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Sunday Sun Worship: रविवार के दिन सूर्य देव की पूजा क्यों है खास? जानें अर्घ्य देने का सही समय और नियम

नई दिल्ली: सनातन धर्म में सूर्य को ‘प्रत्यक्ष देवता’ माना गया है, जो न केवल पंच देवों में प्रधान हैं बल्कि समस्त सृष्टि के ऊर्जा स्रोत भी हैं। रविवार का दिन विशेष रूप से सूर्य देव को समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सूर्य की विशेष पूजा-अर्चना और व्रत करने से भक्तों को यश, कीर्ति, सुख-सौभाग्य और आरोग्य का वरदान प्राप्त होता है।

💧 अर्घ्य देने का सही समय और नियम

ऋग्वेद के अनुसार, सूर्य देव को अर्घ्य देने का सबसे उत्तम समय सूर्योदय के एक घंटे के भीतर होता है। इस समय सूर्य की किरणें अत्यंत शीतल और ऊर्जावान होती हैं। इन किरणों का शरीर पर पड़ना मानसिक स्पष्टता, आत्मबल और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है। शास्त्रों के अनुसार, सूर्य को जल अर्पित करने से कार्यक्षेत्र में सफलता और मान-सम्मान में वृद्धि होती है।

🕒 दिन के अलग-अलग प्रहर में सूर्य पूजा का फल

सूर्य देव की आराधना का प्रभाव समय के साथ बदलता है:

  • सुबह की पूजा: शारीरिक ऊर्जा, सकारात्मकता और मानसिक शांति का संचार करती है।

  • दोपहर की पूजा: ‘ॐ सूर्याय नमः’ मंत्र का जाप करने से आध्यात्मिक शुद्धि और आंतरिक तेज (तेजस्विता) में वृद्धि होती है।

  • संध्या वंदन: ढलते हुए सूर्य की पूजा कृतज्ञता व्यक्त करने और दिनभर की नकारात्मकता को मिटाने के लिए की जाती है।

📜 धार्मिक और पौराणिक महत्व

ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को ‘ग्रहों का राजा’ माना गया है। पौराणिक उल्लेखों के अनुसार, भगवान श्रीराम ने भी लंका विजय से पूर्व सूर्य देव की पूजा की थी। भविष्य पुराण में उल्लेख मिलता है कि श्रीकृष्ण के पुत्र सांब का असाध्य कुष्ठ रोग भी सूर्य उपासना से ही दूर हुआ था। सूर्य देव को आरोग्यता का स्वामी माना गया है, जिनकी नियमित उपासना से असाध्य रोगों से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।