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AI Robots Training in India: अब रोबोट्स सीखेंगे इंसानों से रसोई के काम; भारत में एआई ट्रेनर्स की बढ़ती मांग

नई दिल्ली: भविष्य में रसोई में चाय बनाते या फल काटते हुए जो रोबोट आपको दिखेंगे, उन्हें ट्रेन करने वाले कोई विदेशी इंजीनियर नहीं, बल्कि भारतीय हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को ‘ह्यूमन-लाइक’ व्यवहार सिखाने के लिए भारत में एक अनोखा डेटा-ट्रेनिंग मार्केट विकसित हो रहा है, जहाँ लोग सिर पर कैमरा बांधकर अपने दैनिक कार्यों की रिकॉर्डिंग कर रहे हैं।

📹 1 घंटे के काम के मिल रहे 250 रुपये

चेन्नई और बेंगलुरु जैसे शहरों में गृहिणियां और अन्य पेशेवर अपने सिर पर स्मार्टफोन बांधकर रसोई के काम या अन्य घरेलू कार्य रिकॉर्ड कर रहे हैं। इस 1 घंटे की वीडियो रिकॉर्डिंग के बदले उन्हें लगभग 250 रुपये का भुगतान किया जा रहा है। यह ‘ईगोसेंट्रिक डेटा’ (फर्स्ट-पर्सन फ़ुटेज) टेक कंपनियों के लिए अत्यंत कीमती है, जो मशीनों को यह सिखा रही हैं कि असल दुनिया में इंसानों की तरह कैसे काम किया जाता है।

📲 कैसे काम करता है यह ट्रेनिंग सिस्टम?

यह पूरा प्रोसेस एक खास ऐप के जरिए होता है। जब रिकॉर्डिंग करते समय हाथ सही से डिटेक्ट नहीं होते, तो ऐप तुरंत अलर्ट भेजता है। एआई डेटा कंपनियों के क्लाइंट्स में विश्व की बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियां शामिल हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि रोबोट्स के लिए डिजिटल डेटा से कहीं अधिक कठिन असल जिंदगी के माहौल में काम करना है, जिसे सिर्फ इंसानी व्यवहार को बारीकी से देखकर ही सीखा जा सकता है।

🚀 2050 तक दुनिया में होंगे एक अरब रोबोट

ह्यूमनॉइड रोबोट्स (Humanoid Robots) का मार्केट तेजी से फल-फूल रहा है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि साल 2050 तक दुनिया में एक अरब से अधिक रोबोट्स का उपयोग होगा। इनका इस्तेमाल न केवल औद्योगिक (Industrial) बल्कि कमर्शियल और घरेलू कार्यों में भी बड़े पैमाने पर किया जाएगा। जहाँ कुछ लोग इसे भविष्य की तकनीक मान रहे हैं, वहीं कुछ इसे नौकरियों के भविष्य के लिए एक चुनौती के रूप में भी देख रहे हैं।