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भारत ने अपनी तरफ से पूर्ण सहयोग का वादा दोहराया

म्यांमार के राष्ट्रपति से मिले प्रधानमंत्री मोदी

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः म्यांमार के राष्ट्रपति मिन आंग हलियांग ने 30 मई से 3 जून 2026 तक भारत की आधिकारिक यात्रा की। इस यात्रा के दौरान उन्होंने 1 जून 2026 को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ व्यापक द्विपक्षीय वार्ता की। यह राष्ट्रपति के रूप में उनका भारत का पहला दौरा था।  प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति हलियांग के बीच व्यापार, कनेक्टिविटी, ऊर्जा, रक्षा, सुरक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने भारत की नेबरहुड फर्स्ट, एक्ट ईस्ट  और इंडो-पैसिफिक नीतियों में म्यांमार के रणनीतिक महत्व को रेखांकित किया।

दोनों पक्षों ने समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी प्रयासों पर मिलकर काम करने की सहमति जताई। राष्ट्रपति हलियांग ने इस बात को दोहराया कि म्यांमार की धरती का उपयोग भारत के सुरक्षा हितों के खिलाफ नहीं होने दिया जाएगा।

दोनों नेताओं ने कलादान मल्टी-मोडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट और भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग की प्रगति में तेजी लाने पर जोर दिया। चर्चा में साइबर स्कैम नेटवर्क और मानव तस्करी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत और म्यांमार ने पिछले 18 महीनों में 2,400 से अधिक भारतीय नागरिकों को वहां से सुरक्षित निकालने में सहयोग किया है।  राष्ट्रपति हलियांग ने अपनी यात्रा की शुरुआत बिहार के बोधगया से की। नई दिल्ली में उन्होंने एक व्यापारिक मंच में भी भाग लिया, और इसके बाद वे व्यावसायिक बैठकों के लिए मुंबई गए।

भारत सरकार का स्पष्ट मानना है कि म्यांमार के साथ संवाद बनाए रखना ही आगे का सबसे अच्छा रास्ता है। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने स्पष्ट किया कि भारत का यह जुड़ाव म्यांमार की आंतरिक राजनीतिक व्यवस्था पर कोई टिप्पणी नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र में स्थिरता और अपने सुरक्षा हितों के लिए आवश्यक है। भारत का मानना है कि म्यांमार को अलग-थलग करना उल्टा असर कर सकता है।