Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Jabalpur News: पूर्व मंत्री हरेंद्रजीत सिंह बब्बू को फिर मिली जान से मारने की धमकी; गोरखपुर थाने में... Supreme Court on Kerala Elephant: केरल के सबसे ऊंचे हाथी 'रमन' की कस्टडी पर SC का बड़ा आदेश; व्यावसा... Faridabad News: खुले में कूड़ा फेंका तो लगेगा 50 हजार का जुर्माना; नगर निगम फरीदाबाद का बड़ा एक्शन Rajasamand News: प्री-वेडिंग फोटोशूट के दौरान बड़ा हादसा; कुंड में डूबने से युवक की मौत, मंगेतर के सा... Vaibhav Sooryavanshi Batting: अफगानिस्तान ए के खिलाफ वैभव सूर्यवंशी का तूफान; 200 की स्ट्राइक रेट से... Welcome to the Jungle Trailer: अक्षय कुमार की फिल्म के ट्रेलर लॉन्च पर खर्च हुए 1.5 करोड़; जानें क्यो... Mahendra Makhijani Arrested: अमेरिका में भारतीय मूल के महेंद्र माखीजानी 955 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी क... Ethanol Blending News: पेट्रोल होगा सस्ता! E22-E30 फ्यूल पर सरकार ने खत्म की एक्साइज ड्यूटी, जानें क... WhatsApp Support Ending: जल्द इन पुराने iPhone और Android फोन पर बंद हो जाएगा WhatsApp; जानें क्या ह... Parama Ekadashi 2026: आज है परमा एकादशी; भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए लगाएं इन खास चीजों का भ...

शिवसेना के दोनों गुटों में पुनर्मिलन की आहट

भाजपा के सामने दूसरे दलों का हाल देखकर नई सोच

राष्ट्रीय खबर

मुंबईः चार साल पहले शिवसेना के दो हिस्सों में बटने के बाद उत्पन्न कड़वाहट के बीच अब पार्टी के दोनों खेमों—उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे गुट—के वरिष्ठ नेताओं के सुर बदलते नजर आ रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि जिस रिश्ते (भाजपा) की वजह से पार्टी में विभाजन हुआ था, आज वही भाजपा दोनों गुटों के लिए पुनः एक साथ आने का कारण बनती दिख रही है। महाराष्ट्र की राजनीति में भाजपा के बढ़ते दबदबे को दोनों खेमों के नेता अब एक-दूसरे से बड़ा खतरा मान रहे हैं।

हालिया घटनाक्रम में, शिवसेना (यूबीटी) नेता अंबादास दानवे और शिवसेना (शिंदे गुट) के वरिष्ठ नेता अब्दुल सत्तार ने सार्वजनिक रूप से दोनों गुटों के विलय का समर्थन किया है। दानवे ने कहा कि उन्हें कई मौकों पर ऐसा लगता है कि पार्टी को एकजुट होना चाहिए, लेकिन अकेले उनके चाहने से यह संभव नहीं है। वहीं, सत्तार ने स्पष्ट रूप से कहा कि, अब एकजुट होने का समय आ गया है।

दानवे का तर्क है कि भाजपा व्यवस्थित रूप से अपने क्षेत्रीय सहयोगियों, जिनमें शिवसेना और एनसीपी दोनों शामिल हैं, को कमजोर कर रही है। उन्होंने एक बड़ी मछली द्वारा छोटी मछली को निगलने का उदाहरण देते हुए कहा कि भाजपा शिवसेना को केवल एक राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि दुश्मन मानती है और उसका लक्ष्य शिवसेना का अस्तित्व समाप्त करना है। उन्होंने दावा किया कि जो लोग मूल शिवसेना से अलग हुए थे, उन्हें भी अब यह वास्तविकता समझ में आने लगी है।

शिंदे गुट के अब्दुल सत्तार ने भी इसी सुर में बात करते हुए कहा कि यदि हमारा बड़ा भाई (भाजपा) ही हमें खत्म करने पर आमादा है, तो अलग रहने का कोई औचित्य नहीं है। सत्तार ने स्पष्ट किया कि यदि एकनाथ शिंदे इस विलय के लिए तैयार होते हैं, तो इसमें जरा भी देरी नहीं होगी।

यह राजनीतिक चर्चा ऐसे समय में तेज हुई है जब छत्रपति संभाजीनगर (पूर्ववर्ती औरंगाबाद) में भाजपा का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। कभी अविभाजित शिवसेना का गढ़ माने जाने वाले औरंगाबाद नगर निगम और जिला परिषद पर अब भाजपा का नियंत्रण है। आगामी औरंगाबाद-जालना स्थानीय निकाय चुनाव में भाजपा द्वारा अपना उम्मीदवार उतारने के निर्णय को भी सत्ता के समीकरण बदलने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। नेताओं का मानना है कि यदि क्षेत्रीय दल भाजपा के साथ मिलकर अपनी पहचान खोते रहे, तो आने वाला समय उनके लिए और कठिन हो सकता है।