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शिवसेना के दोनों गुटों में पुनर्मिलन की आहट

भाजपा के सामने दूसरे दलों का हाल देखकर नई सोच

राष्ट्रीय खबर

मुंबईः चार साल पहले शिवसेना के दो हिस्सों में बटने के बाद उत्पन्न कड़वाहट के बीच अब पार्टी के दोनों खेमों—उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे गुट—के वरिष्ठ नेताओं के सुर बदलते नजर आ रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि जिस रिश्ते (भाजपा) की वजह से पार्टी में विभाजन हुआ था, आज वही भाजपा दोनों गुटों के लिए पुनः एक साथ आने का कारण बनती दिख रही है। महाराष्ट्र की राजनीति में भाजपा के बढ़ते दबदबे को दोनों खेमों के नेता अब एक-दूसरे से बड़ा खतरा मान रहे हैं।

हालिया घटनाक्रम में, शिवसेना (यूबीटी) नेता अंबादास दानवे और शिवसेना (शिंदे गुट) के वरिष्ठ नेता अब्दुल सत्तार ने सार्वजनिक रूप से दोनों गुटों के विलय का समर्थन किया है। दानवे ने कहा कि उन्हें कई मौकों पर ऐसा लगता है कि पार्टी को एकजुट होना चाहिए, लेकिन अकेले उनके चाहने से यह संभव नहीं है। वहीं, सत्तार ने स्पष्ट रूप से कहा कि, अब एकजुट होने का समय आ गया है।

दानवे का तर्क है कि भाजपा व्यवस्थित रूप से अपने क्षेत्रीय सहयोगियों, जिनमें शिवसेना और एनसीपी दोनों शामिल हैं, को कमजोर कर रही है। उन्होंने एक बड़ी मछली द्वारा छोटी मछली को निगलने का उदाहरण देते हुए कहा कि भाजपा शिवसेना को केवल एक राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि दुश्मन मानती है और उसका लक्ष्य शिवसेना का अस्तित्व समाप्त करना है। उन्होंने दावा किया कि जो लोग मूल शिवसेना से अलग हुए थे, उन्हें भी अब यह वास्तविकता समझ में आने लगी है।

शिंदे गुट के अब्दुल सत्तार ने भी इसी सुर में बात करते हुए कहा कि यदि हमारा बड़ा भाई (भाजपा) ही हमें खत्म करने पर आमादा है, तो अलग रहने का कोई औचित्य नहीं है। सत्तार ने स्पष्ट किया कि यदि एकनाथ शिंदे इस विलय के लिए तैयार होते हैं, तो इसमें जरा भी देरी नहीं होगी।

यह राजनीतिक चर्चा ऐसे समय में तेज हुई है जब छत्रपति संभाजीनगर (पूर्ववर्ती औरंगाबाद) में भाजपा का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। कभी अविभाजित शिवसेना का गढ़ माने जाने वाले औरंगाबाद नगर निगम और जिला परिषद पर अब भाजपा का नियंत्रण है। आगामी औरंगाबाद-जालना स्थानीय निकाय चुनाव में भाजपा द्वारा अपना उम्मीदवार उतारने के निर्णय को भी सत्ता के समीकरण बदलने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। नेताओं का मानना है कि यदि क्षेत्रीय दल भाजपा के साथ मिलकर अपनी पहचान खोते रहे, तो आने वाला समय उनके लिए और कठिन हो सकता है।