नेतृत्व से मुलाकात और बात के बाद अब सरकार का गठन
राष्ट्रीय खबर
बेंगलुरुः कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डीके शिवकुमार 3 जून को बेंगलुरु में कर्नाटक के 25वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। यह घटनाक्रम उनके सहयोगी सिद्धारमैया द्वारा तीन साल के कड़े सत्ता संघर्ष के बाद पद से इस्तीफा देने के कुछ दिनों बाद सामने आया है। शपथ ग्रहण समारोह लोक भवन के ग्लास हाउस में आयोजित किया जाएगा, जिसमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, कैबिनेट सहयोगियों, पार्टी कार्यकर्ताओं और पूरे कर्नाटक से समर्थकों के शामिल होने की उम्मीद है।
सूत्रों के मुताबिक, 64 वर्षीय शिवकुमार के साथ करीब आठ से दस मंत्री भी शपथ ले सकते हैं। शेष मंत्रियों को 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव के बाद कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है। शिवकुमार की यह नियुक्ति दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान के साथ विचार-विमर्श के बाद सिद्धारमैया के मुख्यमंत्री पद से हटने के फैसले के बाद हुई है। इस सत्ता परिवर्तन को पार्टी नेतृत्व द्वारा तैयार की गई नेतृत्व व्यवस्था के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।
बैठक में मौजूद मंत्रियों के अनुसार, गुरुवार को अपने बेंगलुरु आवास पर आयोजित एक ब्रेकफास्ट मीटिंग में सिद्धारमैया ने कैबिनेट सहयोगियों को पद छोड़ने के अपने फैसले की जानकारी दी थी और संकेत दिया था कि कांग्रेस आलाकमान के निर्देशों के अनुसार शिवकुमार उनके उत्तराधिकारी होंगे।
कांग्रेस नेतृत्व ने हाल ही में सिद्धारमैया से नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए कहा था, साथ ही उन्हें राज्यसभा सीट के साथ राष्ट्रीय स्तर पर भूमिका की पेशकश भी की थी। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि सिद्धारमैया ने अब तक इस केंद्रीय भूमिका के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है।
उम्मीद है कि शनिवार को कांग्रेस विधायक दल की बैठक में शिवकुमार को औपचारिक रूप से नेता चुना जाएगा, जिसके बाद वे आधिकारिक तौर पर मनोनीत मुख्यमंत्री बन जाएंगे। यह नेतृत्व परिवर्तन दिल्ली में कई दिनों तक चले गहन विचार-विमर्श के बाद हुआ है। सिद्धारमैया और शिवकुमार को मंगलवार को कांग्रेस आलाकमान ने तलब किया था, जहां दोनों नेताओं ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल व रणदीप सुरजेवाला के साथ सिलसिलेवार बैठकें की थीं।
कर्नाटक में 2023 में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद से ही रोटेशनल मुख्यमंत्री (बारी-बारी से मुख्यमंत्री बनने) की व्यवस्था को लेकर अटकलें बनी हुई थीं। व्यापक रूप से चर्चा में रहे इस फॉर्मूले के अनुसार, सिद्धारमैया से ढाई साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद पद छोड़ने की उम्मीद थी, ताकि शिवकुमार शेष कार्यकाल के लिए कार्यभार संभाल सकें। हालांकि, उस समय न तो कांग्रेस नेतृत्व और न ही सिद्धारमैया ने सार्वजनिक रूप से ऐसी किसी व्यवस्था को स्वीकार किया था।