इतने दिनों की चुप्पी के बाद नया समीकरण सामने आया है
एजेंसियां
मॉस्कोः रूस और अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने एक सैन्य सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस नए गठबंधन ने मध्य एशिया में मॉस्को के प्रभाव को और अधिक मजबूत कर दिया है। रूस में आयोजित एक अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा मंच के दौरान बुधवार को इस समझौते को अंतिम रूप दिया गया। यह सौदा रूसी सुरक्षा परिषद के सचिव सर्गेई शोइगु और अफगान रक्षा मंत्री मोहम्मद याकूब के बीच हुई एक बैठक के बाद हुआ। तालिबान के रक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर घोषणा की कि याकूब इस सम्मेलन में भाग लेने के लिए विशेष रूप से रूस गए थे।
मोहम्मद याकूब तालिबान के पूर्व सैन्य प्रमुख और तालिबान के संस्थापक मुल्ला मोहम्मद उमर के बेटे हैं। मुल्ला उमर ने ही ओसामा बिन लादेन के साथ गहरा गठबंधन किया था और अल-कायदा को वह सुरक्षित ठिकाना मुहैया कराया था जहाँ से उसने 9/11 के आतंकवादी हमलों की योजना बनाई थी। हालांकि, गुरुवार तक रूस या अफगान पक्ष में से किसी ने भी इस नए सैन्य समझौते के विस्तृत विवरण साझा नहीं किए हैं।
इस बैठक के दौरान याकूब ने कहा, अफगानिस्तान और रूस के बीच लंबे और ऐतिहासिक संबंध रहे हैं। हम इस दिशा में और आगे बढ़ना चाहते हैं। हमने अपने द्विपक्षीय संबंधों का विस्तार किया है। यह समझौता रूस के एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी के उस बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि मॉस्को ने अफगानिस्तान के शासक तालिबान के साथ एक पूर्ण साझेदारी स्थापित कर ली है और वह क्षेत्र के अन्य देशों को भी काबुल के साथ सहयोग बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। गौरतलब है कि अगस्त 2021 में राष्ट्रपति अशरफ गनी के नेतृत्व वाली अमेरिका समर्थित अफगान सरकार का तख्तापलट करने के बाद तालिबान ने दोबारा सत्ता हासिल की थी।
साल 2021 में ही रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने तालिबान को आतंकवादी संगठन की श्रेणी से हटाने की संभावना स्वीकार की थी। इसके बाद 2024 में उन्होंने तालिबान को आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सहयोगी बताया और रूस, अफगानिस्तान के इस नए शासन (इस्लामिक अमीरात ऑफ अफगानिस्तान) को औपचारिक मान्यता देने वाला पहला देश बन गया। जब अगस्त 2021 में तालिबान के लड़ाके अफगान राजधानी में दाखिल हुए थे, तभी से रूस को विशेष तवज्जो मिलने लगी थी। रूसी राजनयिक मिशन को तुरंत सुरक्षा प्रदान की गई और रूसी राजदूत दिमित्री झिरनोव अफगानिस्तान के इन नए शासकों से मिलने वाले पहले विदेशी राजनयिक बने थे। बुधवार को बैठक के दौरान सर्गेई शोइगु ने पश्चिमी देशों से प्रतिबंधों के तहत फ्रीज की गई अफगान संपत्तियों को भी बहाल करने की मांग की।