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हथियारबंद गुटों की झड़प में 52 लोगों की मौत

कोलंबिया में हिंसा का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा

एजेंसियां

बोगोटाः कोलंबिया में कोकीन उत्पादन और उसकी तस्करी के लिहाज से रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण एक इलाके पर नियंत्रण हासिल करने के लिए दो प्रतिद्वंद्वी सशस्त्र गुटों के बीच हिंसक झड़पें हुईं। लड़ाई में शामिल रिवोल्यूशनरी आर्म्ड फोर्सेस ऑफ कोलंबिया के एक धड़े ने गुरुवार को बयान जारी कर बताया कि इस संघर्ष में कम से कम 52 गुरिल्ला लड़ाके मारे गए हैं।

हाल के महीनों में हुई यह सबसे हिंसक झड़प रविवार को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से ठीक पहले हुई है। इस चुनाव में कोलंबियाई नागरिक वामपंथी राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो के उत्तराधिकारी का चुनाव करेंगे। राष्ट्रपति पेट्रो देश के कई सशस्त्र समूहों के साथ शांति वार्ता को अमलीजामा पहनाने के लिए लगातार संघर्ष करते रहे हैं।

रक्षा मंत्री प्रेडो सांचेज़ और सेना दोनों ने सोशल मीडिया पर इस इलाके में लड़ाई होने की पुष्टि की है, लेकिन किसी ने भी मृतकों की संख्या के बारे में कोई सटीक जानकारी नहीं दी। सांचेज़ ने बताया कि नागरिक आबादी की सुरक्षा के लिए क्षेत्र में सैनिकों को तैनात कर दिया गया है। स्वतंत्र रूप से गुरिल्ला समूह द्वारा बताए गए 52 मौतों के आंकड़ों की पुष्टि नहीं हुई है।

यह लड़ाई एमएआरसी के एक विद्रोही गुट, जिसका नेतृत्व नेस्टर ग्रेगोरियो वेरा (जिन्हें इवान मोर्डिस्को के नाम से जाना जाता है) कर रहे हैं, और अलेक्जेंडर डियाज़ मेंडोज़ा (जिन्हें कालार्का कोर्डोबा के नाम से जाना जाता है) के नेतृत्व वाले दूसरे गुट के बीच हुई। इन दोनों ही गुटों ने 2016 के उस शांति समझौते को खारिज कर दिया था, जिसके तहत एफएआरसी के लगभग 13,000 सदस्यों ने अपने हथियार डाल दिए थे।

डियाज़ मेंडोज़ा के नेतृत्व वाला गुरिल्ला समूह इस समय राष्ट्रपति पेट्रो के साथ शांति वार्ता में शामिल है, लेकिन साल 2024 में सरकार द्वारा इस धड़े के साथ द्विपक्षीय संघर्षविराम को निलंबित किए जाने के बाद से वेरा का गुट अभी भी अधिकारियों के साथ संघर्ष में उलझा हुआ है। यह खूनी झड़प दक्षिण-पूर्वी कोलंबिया के गुआवियारे विभाग के जंगलों में, बैरेंको कोलोराडो गाँव के पास हुई।

बता दें कि कोलंबिया में यह सशस्त्र संघर्ष पिछले छह दशकों से भी अधिक समय से चला आ रहा है, जो मुख्य रूप से मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध खनन के पैसों से पोषित होता है। इस लंबे टकराव में अब तक 4,50,000 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है और लाखों लोग विस्थापित हुए हैं।