राज्य में 509 करोड़ के अनधिकृत खर्च पर सवाल
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने असम सरकार के खर्चों में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं को उजागर किया है। इसमें वर्ष 2024-25 के दौरान उचित बजटीय मंजूरी के बिना राज्य की संचित निधि से 509.59 करोड़ रुपये का खर्च शामिल है। असम के राज्य वित्त पर सीएजी की रिपोर्ट के अनुसार, यह राशि सार्वजनिक ऋण और ऋण सेवा से जुड़े विभिन्न मदों के तहत खर्च की गई थी, जबकि इसे मूल बजट या किसी पूरक मांग में शामिल नहीं किया गया था। इसके लिए कोई औपचारिक पुनर्विनियोग आदेश भी जारी नहीं किए गए थे। ऑडिट संस्था ने कहा कि बजटीय मंजूरी के बिना पैसा खर्च करना वित्तीय नियमों का उल्लंघन है और यह विधायिका की मंजूरी के खिलाफ है। इसने सरकारी विभागों में कड़े वित्तीय अनुशासन की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
रिपोर्ट में असम के ऋण पुनर्भुगतान ढांचे पर भी चिंता जताई गई है। इसमें नोट किया गया है कि राज्य का 50 प्रतिशत से अधिक सार्वजनिक ऋण अगले सात वर्षों के भीतर परिपक्व हो जाएगा, जो आने वाले वर्षों में भारी पुनर्भुगतान दबाव का संकेत देता है। पिछले कुछ वर्षों में असम की कुल देनदारियों में वृद्धि हुई है। राज्य की अर्थव्यवस्था में हिस्सेदारी के रूप में, देनदारियां 2020-21 के 25.72 प्रतिशत से बढ़कर 2024-25 में 26.84 प्रतिशत हो गईं। हालांकि, यह अभी भी वित्तीय उत्तरदायित्व नियमों के तहत निर्धारित सीमाओं के भीतर है।
रिपोर्ट में असम की राजस्व स्थिति में गिरावट दर्ज की गई है। जीएसडीपी के हिस्से के रूप में राजस्व प्राप्तियां 19.10 प्रतिशत से घटकर 15.06 प्रतिशत रह गईं, जिसका अर्थ है कि राज्य अपनी अर्थव्यवस्था के आकार की तुलना में कम राजस्व एकत्र कर रहा है। राज्य केंद्रीय करों में अपनी हिस्सेदारी पर अधिक निर्भर होता जा रहा है, जबकि केंद्र से मिलने वाले अनुदान में उल्लेखनीय कमी आई है। कर राजस्व मुख्य रूप से जीएसटी से आया, जिसके बाद बिक्री कर और राज्य उत्पाद शुल्क का स्थान रहा। गैर-कर स्रोतों में पेट्रोलियम और वानिकी का योगदान सबसे अधिक रहा।