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Jheeram Ghati Anniversary: झीरम घाटी हमले की 13वीं बरसी; बस्तर में शहीदों को नमन कर कांग्रेस ने पूछा- कब मिलेगा न्याय?

जगदलपुर: छत्तीसगढ़ के इतिहास के सबसे वीभत्स और जघन्य ‘झीरम घाटी नक्सली हमले’ की 13वीं बरसी पर बस्तर संभाग समेत पूरे प्रदेश भर में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने शहीद राजनेताओं व सुरक्षा बल के जवानों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। इस भावुक अवसर पर कांग्रेस पार्टी ने एक बार फिर झीरम कांड की उच्च स्तरीय जांच और पीड़ितों के लिए न्याय का मुद्दा उठाते हुए वर्तमान सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जगदलपुर के कांग्रेस जिला अध्यक्ष सुशील मौर्य ने इस मौके पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए बेहद कड़े लहजे में कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि इतने लंबे समय के बाद भी पीड़ित परिवारों को अब तक वास्तविक न्याय नहीं मिल सका है।

🤫 ’13 साल बीते, पर आज तक सामने नहीं आई पूरी सच्चाई’: कांग्रेस नेताओं ने झीरम कांड को बताया लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला

जिला अध्यक्ष सुशील मौर्य ने कहा कि आज हम सभी ने मिलकर झीरम हमले के अमर शहीद नेताओं और वीर जवानों की शहादत को नमन करते हुए उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की है। साल 2013 में आज ही के दिन घटे इस रूह कंपा देने वाले घटनाक्रम को आज पूरे 13 साल बीत चुके हैं। लेकिन 13 साल की लंबी अवधि गुजर जाने के बाद भी पीड़ित परिवारों की आंखें न्याय की आस में पथरा गई हैं।

झीरम घाटी हमले की बरसी पर सभी प्रमुख कांग्रेस नेताओं ने शहीदों को याद करते हुए इसे भारतीय लोकतंत्र के इतिहास पर हुआ अब तक का सबसे बड़ा और कायराना हमला बताया। कांग्रेस नेताओं ने संयुक्त बयान में कहा कि घटना के 13 वर्ष गुजर जाने के बावजूद आज तक झीरम कांड के पीछे छिपी पूरी सच्चाई और राजनीतिक षड्यंत्र का खुलासा नहीं किया जा सका है।

“इस ऐतिहासिक नरसंहार के असली मास्टरमाइंड आज तक बेनकाब नहीं हो पाए हैं। केंद्र और राज्य में डबल इंजन की सरकार होने के बावजूद इस मामले की जांच अधूरी पड़ी है। न्याय की आस में पीड़ित परिवार आज भी टकटकी लगाए प्रतीक्षा कर रहे हैं।” — सुशील मौर्य, जिला अध्यक्ष, जगदलपुर कांग्रेस

💣 कैसे और क्यों हुआ था यह आत्मघाती हमला? जानिए 2013 की उस ‘परिवर्तन यात्रा’ की पूरी बैकस्टोरी

दरअसल, साल 2013 में होने वाले छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव से ठीक पहले तत्कालीन सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पूरे प्रदेश में अपनी उपलब्धियां गिनाने के लिए ‘विकास यात्रा’ निकाली थी। इसके जवाब में विपक्षी दल कांग्रेस पार्टी ने पूरे सूबे में जनसमर्थन जुटाने के लिए ‘परिवर्तन यात्रा’ की शुरुआत की थी।

सुकमा जिले में आयोजित एक बड़ी जनसभा से वापस जगदलपुर लौटने के दौरान, दरभा क्षेत्र के घने जंगलों से घिरी झीरम घाटी में नक्सलियों ने पहले से ही घातक एंबुश (घात) लगाकर कांग्रेस पार्टी के विशाल काफिले पर चारों तरफ से अंधाधुंध गोलियों की बौछार कर हमला बोल दिया। नक्सलियों द्वारा किए गए इस भीषण और खूनी हमले में छत्तीसगढ़ कांग्रेस की एक पूरी शीर्ष राजनीतिक पीढ़ी पलभर में समाप्त हो गई थी।

🐅 ‘बस्तर टाइगर’ महेंद्र कर्मा समेत कांग्रेस की पूरी लीडरशिप ने गंवाई थी जान: आज भी न्याय की उम्मीद में बैठे हैं पीड़ित

इस ऐतिहासिक और खौफनाक नक्सली हमले में ‘बस्तर टाइगर’ के नाम से मशहूर महेंद्र कर्मा, तत्कालीन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके युवा पुत्र दिनेश पटेल और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल जैसे कद्दावर व राष्ट्रीय स्तर के बड़े राजनेता शामिल थे, जिनकी इस हमले में क्रूरतापूर्वक जान ले ली गई। इनके अलावा कई वरिष्ठ पार्टी पदाधिकारी और सुरक्षा में तैनात दर्जनों जवान भी वीरगति को प्राप्त हुए थे। इस दिल दहला देने वाली घटना ने न केवल पूरे बस्तर संभाग को बल्कि पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।

घटना के तुरंत बाद भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस पार्टी दोनों ही दलों के शीर्ष नेताओं ने देश की जनता से यह वादा किया था कि झीरम घटना का कड़वा सच बहुत जल्द ही उच्च स्तरीय जांच के जरिए बाहर लाया जाएगा। लेकिन आज इस त्रासदी को 13 साल बीत चुके हैं, पर सच्चाई आज भी फाइलों में दफन है। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच, आज भी घटना की असल कड़ियां सामने नहीं आई हैं और न्याय की अंतिम उम्मीद लगाकर पीड़ित परिवार और बस्तर की जनता सरकार की तरफ देख रही है।