Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Bhopal Twisha Case: रिमांड पर आरोपी पति समर्थ सिंह बदल रहा बयान; पुलिस कमिश्नर ने कहा- जांच भटकाने क... Datia Forest Fire: दतिया के आदिवासी डेरा में जंगल की आग का तांडव; 12 घर जलकर खाक, खुले आसमान के नीचे... Dewas Fake Marriage: देवास में शादी के नाम पर महाफर्जीवाड़ा; अनाथ लड़कियों का झांसा देकर 42 दूल्हों ... Twisha Sharma Case: ट्विशा शर्मा मौत मामले की जांच करेगी CBI; सुप्रीम कोर्ट सख्त, मीडिया ट्रायल पर ज... FIFA World Cup 2026: फुटबॉल का ऐसा पागलपन! फीफा वर्ल्ड कप के सारे टिकट खरीदने के लिए बुजुर्ग ने बेच ... King Movie Update: शाहरुख खान की 'किंग' में हुई रणवीर सिंह की धमाकेदार एंट्री? यूरोप में गुपचुप शूट ... Iran Drone Program: ईरान ने UAE की कंपनी के जरिए चीन से खरीदे एडवांस सैटेलाइट उपकरण; FT की रिपोर्ट म... Fuel Price Hike: भारत में 11 दिनों में 4 बार बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम; जानें क्यों दुनिया के मुकाबले... X Monetization Update: कॉपी-पेस्ट करने वाले क्रिएटर्स पर X सख्त; अब ओरिजिनल क्रिएटर को ही मिलेंगे सा... Dandraua Dham Bhind: भिंड में 'डॉक्टर हनुमान' करते हैं गंभीर बीमारियों का इलाज; दर्शन मात्र से दूर ह...

World Thyroid Day: क्या थायराइड की दवा जिंदगी भर खानी पड़ती है? जानें इस बीमारी से जुड़े 3 बड़े मिथक और सच

नई दिल्ली: थायराइड ग्रंथि से हार्मोन का ज्यादा बनना या बेहद कम बनना, दोनों ही स्थितियां शरीर के गंभीर बीमारी की चपेट में आने का साफ संकेत हैं। आज के समय में थायराइड को लेकर समाज में कई तरह के मिथक और गलतफहमियां फैली हुई हैं, जिन पर लोग आंख मूंदकर भरोसा कर लेते हैं। उदाहरण के लिए, कुछ लोग मानते हैं कि अगर यह बीमारी एक बार हो गई, तो इसकी दवा को जिंदगी भर खाना पड़ता है। वहीं ऐसा भी कहा जाता है कि यह सिर्फ महिलाओं में होने वाली बीमारी है। थायराइड को लेकर ऐसे कई भ्रामक मिथक लोगों के बीच काफी पॉपुलर हैं।

इसीलिए हर साल 25 मई को ‘वर्ल्ड थायराइड डे’ (World Thyroid Day) मनाया जाता है ताकि आम लोग यह अच्छी तरह समझ पाएं कि यह भी एक गंभीर और ध्यान देने योग्य समस्या है। इसके होने पर ज्यादातर मामलों में वजन का अचानक बढ़ना या तेजी से घटना शरीर को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है। हां, यह वैज्ञानिक रूप से सच है कि महिलाओं में इसके होने की आशंका पुरुषों की तुलना में अधिक रहती है, लेकिन ऐसा बिल्कुल जरूरी नहीं है कि पुरुष इससे सुरक्षित हैं। वर्ल्ड थायराइड डे के विशेष मौके पर हम आपको इस बीमारी से जुड़े कुछ बड़े मिथक और बेहद जरूरी स्वास्थ्य जानकारी बताने जा रहे हैं।

🦋 आखिर क्यों होती है थायराइड की बीमारी? जानिए गले में मौजूद इस ‘बटरफ्लाई’ ग्रंथि का मुख्य काम

दरअसल, हमारे गले के निचले हिस्से में थायराइड ग्रंथि मौजूद होती है, जिसका प्राकृतिक आकार एक सुंदर तितली (Butterfly) जैसा होता है। इस ग्रंथि का मुख्य काम हमारे द्वारा खाए जाने वाले भोजन को शरीर के इस्तेमाल के लिए एनर्जी (ऊर्जा) में तब्दील करना यानी मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करना होता है। जब यह ग्रंथि असंतुलित हो जाती है, तो शरीर का पूरा सिस्टम बिगड़ने लगता है।

❌ थायराइड से जुड़े 3 बड़े मिथक और उनका वैज्ञानिक फैक्ट (Myth vs Fact)

  • मिथक 1- जिंदगी भर खानी पड़ती है दवा:

    • फैक्ट (सच): आम लोगों में यह बहुत बड़ा भ्रम फैला हुआ है कि अगर किसी को थायराइड डायग्नोस हो गया है, तो उसे मरते दम तक दवा लेनी पड़ेगी। हेल्थ एक्सपर्ट्स कहते हैं कि कुछ गंभीर मामलों में लंबे समय तक दवाएं जरूर चलती हैं, लेकिन ऐसा हर मरीज के साथ हो, यह बिल्कुल जरूरी नहीं है। सही समय पर लाइफस्टाइल (दिनचर्या) में सुधार, पौष्टिक आहार और सही इलाज से दवा की डोज कम हो सकती है या पूरी तरह बंद भी हो सकती है।

  • मिथक 2- सिर्फ महिलाओं को होता है थायराइड:

    • फैक्ट (सच): हालांकि थायराइड के ज्यादातर मामले महिलाओं में ही देखे जाते हैं, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है कि यह सिर्फ महिलाओं को होने वाली बीमारी है। पुरुष और छोटे बच्चे भी बड़ी आसानी से इसकी चपेट में आ सकते हैं। पुरुषों में अक्सर इस बीमारी के लक्षणों को सामान्य थकान मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, जो बाद में गंभीर रूप ले लेता है।

  • मिथक 3- यह सिर्फ गले की एक सामान्य बीमारी है:

    • फैक्ट (सच): भले ही थायराइड की ग्रंथि हमारे गले में स्थित होती है, लेकिन इसका सिस्टम और हार्मोनल बैलेंस बिगड़ते ही पूरे सिर से लेकर पैर तक असर पड़ता है। यह सिर्फ गले की बीमारी नहीं है। इसके होने पर हार्ट रेट (दिल की धड़कन) का अनियंत्रित होना, एनर्जी लेवल हमेशा डाउन रहना, अत्यधिक मूड स्विंग्स और नींद न आना (इंसोमनिया) जैसी कई गंभीर हेल्थ प्रॉब्लम्स होने लगती हैं।

📊 भारत में 4.2 करोड़ लोग थायराइड की चपेट में: बिना आयोडीन वाला नमक और जेनेटिक कारण हैं मुख्य वजह

विश्वसनीय चिकित्सा रिपोर्ट (NCBI) बताती है कि वर्तमान में भारत में करीब 4.2 करोड़ लोग किसी न किसी रूप में थायराइड की चपेट में हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि इस रोग के होने के पीछे कई प्रमुख कारण जिम्मेदार होते हैं। इनमें जेनेटिक (अनुवांशिक) कारण, ऐसी दवाइयों का सेवन जिसमें आयोडीन की मात्रा बहुत अधिक हो, या फिर लंबे समय तक बिना आयोडीन वाले नमक का इस्तेमाल करना शामिल है। इसके अलावा, शरीर में स्वप्रतिरक्षी रोग (Autoimmune Diseases) होने से भी इसका जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। शरीर में खून की कमी (एनीमिया), टाइप-1 डायबिटीज, सीलिएक रोग, एडिसन रोग, ल्यूपस, गठिया (अर्थराइटिस) और स्जोग्रेन सिंड्रोम भी थायराइड के असंतुलन की बड़ी वजह हो सकते हैं।

🩺 हाइपोथायरायडिज्म और हाइपरथायरायडिज्म: समझिए थायराइड के इन दोनों मुख्य प्रकारों को और इनके लक्षण

थायराइड मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है, जिनके लक्षण एक-दूसरे से बिल्कुल अलग होते हैं:

  1. हाइपोथायरायडिज्म (Hypothyroidism): यह थायराइड का सबसे कॉमन और ज्यादा पाया जाने वाला प्रकार है। इस कंडीशन में थायराइड ग्लैंड से बहुत ही कम मात्रा में थायराइड हार्मोन निकलते हैं। इसके कारण मरीज का वजन अचानक बढ़ने लगता है, डाइजेशन (पाचन) में लगातार प्रॉब्लम रहती है, हार्ट रेट बहुत स्लो हो जाती है, स्किन में अत्यधिक ड्राइनेस (रूखापन) आ जाती है और कब्ज (Constipation) की शिकायत रहने लगती है। पूरी ओवरऑल बॉडी में छोटे-छोटे सुस्त बदलाव नजर आते हैं, जिसके कारण ज्यादातर लोगों को इस बीमारी के बारे में काफी देर से पता चलता है।

  2. हाइपरथायरायडिज्म (Hyperthyroidism): यह थायराइड का दूसरा प्रकार है, जिसमें ग्रंथि से जरूरत से ज्यादा मात्रा में हार्मोन का सीक्रेशन (उत्पादन) होने लगता है। इस टाइप से ग्रस्त होने पर मरीज का वजन बहुत तेजी से गिरने लगता है, चाहे वह कितना भी खाना क्यों न खाए। इसके अन्य लक्षणों में हार्ट रेट का अचानक बहुत तेज हो जाना, त्वचा का अजीब और संवेदनशील होना, हमेशा अत्यधिक थकान व घबराहट महसूस होना, मानसिक तनाव और हर समय आलस बना रहना शामिल है। इस कंडीशन में शरीर का मेटाबॉलिज्म बहुत हाई हो जाता है, जिससे मसल्स कमजोर पड़ने लगती हैं, जोड़ों में दर्द शुरू हो जाता है और रात में सुकून की नींद आने में भारी दिक्कतें होती हैं। वर्ल्ड थायराइड डे पर डॉक्टरों की सलाह है कि साल में कम से कम एक बार थायराइड प्रोफाइल टेस्ट (T3, T4, TSH) जरूर करवाएं।