अपने बदले इजरायल की सुरक्षा में भारी खर्च
एजेंसियां
वाशिंगटनः पेंटागन के भीतर से आए नए और गंभीर आंकड़े संकेत देते हैं कि अमेरिकी सेना वर्तमान में मिसाइल हमलों से इजरायल की रक्षा करने में खुद इजरायली सेना की तुलना में अधिक संसाधन खर्च कर रही है। रक्षा विभाग के आकलनों की जानकारी रखने वाले तीन अधिकारियों ने गुरुवार को द वाशिंगटन पोस्ट को बताया कि यह असंतुलित प्रयास इस बात को रेखांकित करता है कि वाशिंगटन ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के दौरान ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल हमलों का मुकाबला करने का कितना बड़ा बोझ अपने कंधों पर उठाया है।
इन आकलनों के अनुसार, अमेरिकी बलों ने कुछ विशिष्ट हाई-एल्टीट्यूड इंटरसेप्टर सिस्टम (अधिक ऊंचाई पर मिसाइल रोकने वाली प्रणाली) के अपने कुल भंडार का आधा हिस्सा तक इस्तेमाल कर डाला है, जबकि इजरायल ने अपने सिस्टम को तुलनात्मक रूप से धीमी गति से तैनात किया है। वाशिंगटन डी.सी. के थिंक टैंक स्टिमसन सेंटर की सीनियर फेलो केली ग्रीको ने पोस्ट को बताया, ये आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं। उन्होंने आगे कहा, जब इजरायल ने अपनी मिसाइलों के भंडार को सुरक्षित रखा, उस दौरान संयुक्त राज्य अमेरिका ने मिसाइल रक्षा मिशन का अधिकांश भार खुद संभाल लिया। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस अंधाधुंध उपयोग की दर ने ऐसी स्थिति पैदा कर दी है जहां उत्पादन मांग के साथ तालमेल बिठाने में असमर्थ हो गया है।
इस स्थिति ने जाहिर तौर पर एशिया में अमेरिकी सहयोगियों, विशेष रूप से दक्षिण कोरिया और जापान के बीच चिंता पैदा कर दी है, जो चीन और उत्तर कोरिया जैसे शत्रुतापूर्ण देशों के हमलों को रोकने के लिए अमेरिकी एंटी-मिसाइल रक्षा प्रणालियों पर निर्भर हैं। वाशिंगटन डी.सी. के ही एक अन्य लिबरटेरियन थिंक टैंक काटो इंस्टीट्यूट में रक्षा और विदेश नीति अध्ययन के निदेशक जस्टिन लोगन का तर्क है कि यह असंतुलन डोनाल्ड ट्रंप के अक्सर प्रचारित किए जाने वाले अमेरिका फर्स्ट (पहले अमेरिका) के एजेंडे के साथ एक विश्वासघात का संकेत देता है। फिलहाल पिछले कुछ हफ्तों से ट्रंप का यह युद्ध एक अनिश्चित अधर में लटका हुआ है। एक अस्थायी युद्धविराम अभी भी लागू है, और उनके प्रशासन ने प्रभावी रूप से इस संघर्ष के सक्रिय चरण को समाप्त घोषित कर दिया है।