पेरू में राष्ट्रपति चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज
एजेंसियां
लीमाः पेरू में आगामी राष्ट्रपति चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। हाल ही में जारी इप्सोस पेरू के एक नए ओपिनियन पोल के अनुसार, दक्षिणपंथी उम्मीदवार केइको फुजीमोरी ने अपने प्रतिद्वंद्वी और वामपंथी नेता रोबेर्टो सांचेज़ पर मामूली बढ़त बना ली है। आगामी 7 जून को होने वाले दूसरे दौर के (रनऑफ) मतदान के लिए फुजीमोरी को 39 प्रतिशत मतदाताओं का समर्थन मिलता दिख रहा है, जबकि सांचेज़ 35 प्रतिशत मतों के साथ दूसरे स्थान पर हैं। यह सर्वेक्षण 16 और 17 मई को आयोजित किया गया था और इसे स्थानीय समाचार पत्र पेरू 21 में प्रकाशित किया गया है।
इससे पहले अप्रैल के अंत में जारी इप्सोस के पोल में दोनों उम्मीदवारों के बीच कड़ा मुकाबला था और दोनों 38 प्रतिशत मतों के साथ बराबरी पर थे। पूर्व राष्ट्रपति अल्बर्टो फुजीमोरी की बेटी केइको फुजीमोरी चौथी बार राष्ट्रपति पद की दौड़ में शामिल हैं। उन्होंने 12 अप्रैल को हुए पहले दौर के चुनाव में 17 प्रतिशत वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी। दूसरी ओर, जेल में बंद पूर्व वामपंथी राष्ट्रपति पेड्रो कैस्टिलो के सहयोगी रोबेर्टो सांचेज़ ने पहले दौर में 12 प्रतिशत वोट पाकर बेहद करीबी अंतर से रनऑफ में अपनी जगह बनाई थी।
सांचेज़ की आर्थिक नीतियों को लेकर निवेशकों में थोड़ी चिंता है, जिसे दूर करने के लिए उनके आर्थिक योजना दल के नवनियुक्त प्रमुख पेड्रो फ्रैंके ने हाल ही में बयान दिया है। उन्होंने कहा कि वे निजी संपत्ति का सम्मान करेंगे और मनमाने ढंग से समझौतों को तोड़ने जैसी चीजें नहीं होंगी। फ्रैंके ने सांचेज़ के कुछ कट्टरपंथी प्रस्तावों (जैसे नया संविधान और खनन अनुबंधों की समीक्षा) से खुद को दूर रखते हुए स्पष्ट किया कि अनुबंधों को मनमाने ढंग से नहीं तोड़ा जाएगा।
दूसरी ओर, फुजीमोरी का पूरा ध्यान सार्वजनिक व्यवस्था को बहाल करने, अपराध और भ्रष्टाचार से निपटने पर केंद्रित है। बाजार विश्लेषक उन्हें एक अनुशासित व्यापक आर्थिक नीति के समर्थक के रूप में देख रहे हैं। इप्सोस के अनुसार, मई में फुजीमोरी का विरोध घटकर 44 प्रतिशत हो गया है, जो अप्रैल में 48 प्रतिशत था। हालांकि, यह अभी भी सांचेज़ के 40 प्रतिशत विरोध की तुलना में अधिक है। इस पोल में प्लस-माइनस 2.8 प्रतिशत की त्रुटि सीमा (मार्जिन ऑफ एरर) है। सर्वेक्षण में शामिल 26 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे किसी को वोट नहीं देंगे या खाली मतपत्र डालेंगे। दोनों मुख्य उम्मीदवारों के बीच 31 मई को और उनकी तकनीकी टीमों के बीच 24 मई को बहस (डिबेट) होनी तय हुई है।