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Ujjain Garbage Cafe: उज्जैन में कचरे के बदले मिलेगी चाय, कॉफी और भरपेट खाना; नगर निगम खोलने जा रहा 3 ‘कचरा कैफे’

उज्जैन: मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन से स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक बेहद शानदार और अनोखी खबर सामने आई है। उज्जैन नगर निगम ने शहरवासियों को स्वच्छता के प्रति प्रेरित करने, जागरूक करने और रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देने के लिए एक बेहद अनूठी पहल की है। इसके तहत नगर निगम शहर में अत्याधुनिक ‘कचरा कैफे’ (Garbage Cafe) बनाने जा रहा है। नगर निगम आयुक्त ने इस प्रोजेक्ट के बारे में आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया कि शहर के तीन प्रमुख और व्यस्त स्थानों पर ये विशेष कैफे खोले जाएंगे। इन कैफे पर सूखा व प्लास्टिक कचरा लाकर देने वाले लोगों के लिए विशेष डिजिटल कॉइन (Coin) जारी किए जाएंगे, जिसका उपयोग आम लोग कैफे के अंदर खाने-पीने की स्वादिष्ट चीजें लेने में आसानी से कर सकेंगे।

☕ क्या कचरे से मिल सकता है नाश्ता और कीमती सामान?: उज्जैन में जल्द शुरू होने जा रहे हैं 3 हाई-टेक ‘कचरा कैफे’

क्या आपने कभी अपने जीवन में यह सुना या सोचा है कि जिस सामग्री को हम बेकार या बदबूदार कचरा समझकर डस्टबिन में फेंक देते हैं, उससे कभी हमें गरमा-गरम चाय, कॉफी और भरपेट खाना भी मिल सकता है? अगर आपका जवाब ‘ना’ है, तो फिर उज्जैन से आई यह खबर आपके बहुत काम की है। उज्जैन नगर निगम द्वारा जल्द ही धरातल पर तीन चुनिंदा जगहों पर कचरा कैफे की विधिवत शुरुआत की जा रही है। इन सेंटर्स पर कचरे के उचित वर्गीकरण के बदले स्थानीय लोगों को न केवल चाय, कॉफी और सुबह का नाश्ता मिलेगा, बल्कि दोपहर और रात का पौष्टिक खाना और अन्य जरूरी कीमती सामान भी उपलब्ध कराया जाएगा।

📦 सूखा कचरा और प्लास्टिक वेस्ट के बदले मिलेंगे डिजिटल कॉइन: निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा ने दी पूरी कार्ययोजना की जानकारी

इस ड्रीम प्रोजेक्ट की विस्तृत तकनीकी जानकारी देते हुए उज्जैन नगर निगम के आयुक्त अभिलाष मिश्रा ने बताया कि, “कचरे की इकोनॉमी वैल्यू (Economic Value) को बढ़ाने और कचरा प्रबंधन को रीसायकल इंडस्ट्री से जोड़ने के लिए जल्द ही हम शहर के तीन अलग-अलग प्राइम लोकेशंस पर कचरा कैफे की शुरुआत करने वाले हैं।”

उन्होंने आगे बताया कि इन कैफे में चार अलग-अलग बड़े बॉक्स (कंटेनर) लगाए जाएंगे। यहाँ आकर शहरवासी अपना सूखा कचरा, प्लास्टिक की वेस्ट बोतलें/सामान और घरेलू हानिकारक वेस्ट सामग्री (जैसे इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट या पुरानी बैटरी) कचरा कैफे के काउंटर पर जमा कराकर उसके बदले में तत्काल डिजिटल कॉइन ले सकेंगे। इन कॉइन्स के जरिए शहरवासी कैफे से जुड़े वेंडर्स से खाने-पीने की सामग्री के साथ-साथ अन्य उपयोगी कीमती सामान भी खरीद सकेंगे।

👩‍िलाओं और स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को मिलेगा रोजगार: फ्रीगंज, नानाखेड़ा और महाकाल मंदिर पार्किंग के पास खुलेंगे कैफे

निगम आयुक्त ने बताया कि इस पूरे प्रोजेक्ट को सोशल वेलफेयर से जोड़ा गया है। कचरा कैफे का मुख्य उद्देश्य लोगों को स्वच्छता के प्रति व्यावहारिक रूप से जागरूक करना और महिला सशक्तिकरण के तहत स्थानीय स्तर पर रोजगार को बढ़ावा देना है। इसीलिए इन कैफे के संचालन की पूरी जिम्मेदारी प्रमुख रूप से महिलाओं एवं स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को सौंपने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए कुछ कड़े नियम और शर्तें भी तय की गई हैं। जो एजेंसी या महिला स्वयं सहायता समूह नगर निगम को सबसे अधिक रॉयल्टी देने का प्रस्ताव देगा, उसे ही इस कैफे का टेंडर (काम) दिया जाएगा।

इस कचरा कैफे को चलाने के लिए नगर निगम की एक शर्त यह भी है कि वे कैफे चलाने वाले समूह को कोई सीधा वित्तीय भुगतान या सैलरी नहीं करेंगे। नगर निगम सिर्फ उनके लिए मुफ्त पानी और निर्बाध बिजली की व्यवस्था सुनिश्चित करेगा। नगर निगम ने शहर के जिन तीन स्थानों को इसके लिए चिन्हित किया है, वे इस प्रकार हैं:

  • पहला कैफे: फ्रीगंज में प्रसिद्ध सेठी बिल्डिंग के बिल्कुल सामने।

  • दूसरा कैफे: नानाखेड़ा बस स्टॉप के व्यस्त इलाके के पास।

  • तीसरा कैफे: विश्व प्रसिद्ध महाकाल मंदिर के पीछे स्थित चारधाम पार्किंग के समीप।

🛑 गड़बड़ी या लापरवाही करने वाले संचालकों पर होगी सख्त कार्रवाई: रॉयल्टी जमा न करने पर सीधे रद्द होगा अनुबंध

कचरा कैफे का संचालन पूरी पारदर्शिता और ठीक तरीके से हो, इस पर भी नगर निगम के आला अधिकारियों ने पूरा खाका तैयार किया है। निगम के जिम्मेदारों का स्पष्ट कहना है कि कचरा कैफे का संचालन करने वाली समिति या व्यक्ति को हर महीने की 5 तारीख तक तय रॉयल्टी सरकारी खजाने में अनिवार्य रूप से जमा करवानी होगी। सभी चयनित समितियों को अपना काम पूरी ईमानदारी, स्वच्छता और बेहतर कस्टमर सर्विस के साथ करना होगा। यदि इन कैफे के खिलाफ जनता या निगम को कोई भी शिकायत मिलती है, तो पहले उसकी उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच करवाई जाएगी। जांच में गड़बड़ी या वित्तीय हेरफेर मिलने पर तुरंत कारण बताओ नोटिस जारी किए जाएंगे। संतोषजनक जवाब न मिलने पर अनुबंध (Agreement) को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने जैसी प्रभावी कानूनी कार्रवाई भी अमल में लाई जाएगी। इस प्रकार की प्रशासनिक सख्ती को देखकर यह साफ तौर पर कहा जा सकता है कि इस बार शहर में जो कचरा कैफे का संचालन होने वाला है, उस पर जिम्मेदारों की चौबीसों घंटे पूरी तीसरी आंख (निगरानी) रहने वाली है।