Defence Minister Rajnath Singh: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर राजनाथ सिंह की हुंकार- दुश्मन को घर में घुसकर मारेंगे
केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के सख्त तेवर एक बार फिर साफ कर दिए हैं। राजस्थान के नागौर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र करते हुए पड़ोसी देश पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया। राजनाथ ने कहा कि भारत अब आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर चल रहा है और उकसाने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
⚔️ ऑपरेशन सिंदूर की सफलता: सेना की तीनों टुकड़ियों ने दिखाया अभूतपूर्व तालमेल
मई 2025 में हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की चर्चा करते हुए रक्षा मंत्री ने बताया कि यह ऑपरेशन भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना के बीच अभूतपूर्व तालमेल का परिणाम था। उन्होंने कहा, “2016 में सर्जिकल स्ट्राइक हुई, 2019 में बालाकोट और अब 2025 में ऑपरेशन सिंदूर। हमारी तीनों सेनाओं ने जिस तरह सटीक प्रहार किया, उसने दुनिया को भारत की नई और आधुनिक सैन्य क्षमता का लोहा मनवा दिया है।”
🇮🇳 सीमा की परवाह नहीं: पहलगाम हमले का जवाब दुश्मन के घर में घुसकर दिया
राजनाथ सिंह ने जोर देकर कहा कि पहलगाम आतंकी हमले में निर्दोषों की हत्या का जवाब देने के लिए भारत ने सीमाओं की परवाह नहीं की। उन्होंने स्पष्ट किया, “अब कोई भी सीमा भारत को अपने नागरिकों की रक्षा करने से नहीं रोक सकती। हमने दुनिया को बता दिया है कि अब भारत चुप रहने वाला देश नहीं है। हमले का जवाब दुश्मन के घर में घुसकर दिया जाएगा और सुरक्षा के आड़े कोई भी सरहद नहीं आ सकती।”
🚀 मल्टी-डोमेन प्रहार: नई युद्ध रणनीति में ड्रोन और मिसाइलों का सटीक उपयोग
ऑपरेशन सिंदूर भारत की नई युद्ध रणनीति का हिस्सा था, जिसमें ड्रोन, लंबी दूरी की मिसाइलों और एडवांस सर्विलांस का व्यापक इस्तेमाल किया गया। राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत की नीति स्पष्ट है—हम किसी को पहले नहीं छेड़ते, लेकिन अगर कोई हम पर आंख उठाएगा, तो उसे ऐसा निर्णायक जवाब मिलेगा जिसे पीढ़ियां याद रखेंगी। यह नई कूटनीतिक और सैन्य शक्ति का उदय है।
🍃 सादगी और अनुशासन: ईंधन बचाने के लिए रक्षा मंत्री ने कम किया अपना काफिला
आतंकवाद पर कड़े प्रहार के साथ-साथ राजनाथ सिंह ने व्यक्तिगत अनुशासन का भी उदाहरण पेश किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ईंधन बचाने और पर्यावरण सुरक्षा की अपील के बाद, रक्षा मंत्री ने अपने सरकारी काफिले को आधा करने का फैसला किया है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में इसे एक बड़ा और प्रेरणादायक कदम माना जा रहा है।