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Psycho Killer Gurpreet: 7 और बेकसूरों की हत्या की थी साजिश? गुरप्रीत सिंह को लेकर पड़ोसियों ने खोले बड़े राज

Chandauli News: उत्तर प्रदेश के चंदौली में एनकाउंटर में ढेर हुआ सेना का रिटायर्ड जवान गुरप्रीत सिंह कोई साधारण अपराधी नहीं, बल्कि एक खूंखार साइको किलर था. पुलिस की पड़ताल में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि गुरप्रीत के निशाने पर 7 और लोग थे. अगर वो समय रहते पकड़ा न जाता, तो मौतों का यह आंकड़ा दहाई पार कर जाता. क्राइम सीन रिक्रिएशन के दौरान पुलिस की पिस्टल छीनकर भागने की कोशिश करने वाला गुरप्रीत अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन पीछे छोड़ गया है रूह कंपा देने वाली कई कहानियां

पुलिस की थ्योरी के अनुसार, गुरप्रीत ने जिस पैटर्न पर 25 घंटों के भीतर 3 लोगों की हत्या की, वो उसी सिलसिले को आगे बढ़ाने वाला था. उसके पास कुल 10 कारतूस थे, जिनमें से 3 का इस्तेमाल वह कर चुका था. 7 कारतूस अभी भी उसके पास बचे थे, जो इस बात का स्पष्ट संकेत थे कि वह 7 और लोगों की कनपटी पर गोली मारने की फिराक में था. वारदातों का पैटर्न एक जैसा था- बिना किसी जान-पहचान या दुश्मनी के, उसने तीनों शिकारों की कनपटी पर सटाकर गोली मारी थी.

कौन था गुरप्रीत सिंह?

45 साल का गुरप्रीत सिंह पंजाब के तरनतारन जिले के तरहतूचक गांव का रहने वाला था. साल 2006 में वह सेना में भर्ती हुआ और 2021 में 15 साल की सेवा के बाद रिटायर हुआ. गांव वालों के मुताबिक, सेना में रहने के दौरान वह एक पूर्ण सिख के रूप में रहता था- सिर पर पगड़ी और चेहरे पर दाढ़ी.

रिटायरमेंट के बाद जब वह गांव लौटा, तो वह डिप्रेशन का शिकार हो गया. इसी तनाव में उसने अपने बाल कटवा लिए और दाढ़ी भी हटा दी. वह शराब का बेहद शौकीन था और अधिकतर समय चुप रहता था. उसके पास करीब 10 बीघा जमीन थी और वह एक आलीशान घर में अपनी पत्नी और दो बच्चों (13 साल का बेटा और 14 साल की बेटी) के साथ रहता था.

नौकरी का छूटना और सनक की शुरुआत

आर्मी से रिटायर होने के बाद गुरप्रीत ने एक सिक्योरिटी एजेंसी जॉइन की थी. उसकी ड्यूटी कोलकाता के एक बैंक में लगी थी, लेकिन शराब पीने की आदत के कारण वहां से उसे हटा दिया गया. इसके बाद 29 अप्रैल को वह बिहार के आरा पहुंचा, जहां उसने एक बैंक में गार्ड की नौकरी शुरू की.

वहां भी महज 4-5 दिनों में ही उसका कर्मचारियों और ग्राहकों से झगड़ा हो गया. बैंक मैनेजर ने जब उसे नौकरी से निकाला, तो वह पंजाब जाने के बजाय चंदौली और मुगलसराय (पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन) के आसपास भटकने लगा. यहीं से उसके भीतर का ‘साइको किलर’ जाग गया.

बैग में हथियार लेकर घूमता रहा कातिल

गुरप्रीत की गिरफ्तारी ने रेलवे सुरक्षा तंत्र (RPF) और स्टेशन पर लगे मेटल डिटेक्टर्स की पोल खोल दी है. वह अपने बैग में एक रिवॉल्वर और एक डबल बैरल बंदूक लेकर घूम रहा था. उसने बंदूक की नाल काट दी थी ताकि वह आसानी से बैग में समा जाए.

हैरानी की बात यह है कि मुगलसराय जैसे बड़े जंक्शन पर मेटल डिटेक्टर उसे पकड़ नहीं सके. वह रात भर स्टेशन पर रहा और फिर ट्रेनों में हत्याएं कीं. इसके बाद उसने एक अस्पताल में भर्ती महिला को भी मौत के घाट उतार दिया.

‘उसे खुद नहीं पता था कि वह क्या कर रहा है’

वाराणसी रेंज के DIG वैभव कृष्णा ने बताया कि गुरप्रीत के पास करीब 10 हजार रुपए और कुछ कपड़े थे. पूछताछ में वह हत्याओं की कोई ठोस वजह नहीं बता सका. डीआईजी के अनुसार, “उसे खुद स्पष्ट नहीं था कि उसे कहां जाना है. जो भी उसके सामने आया, उसने उसे गोली मार दी.”

फिलहाल पुलिस उसके पुराने आपराधिक इतिहास की जानकारी जुटा रही है. पंजाब में उसके परिवार को सूचित कर दिया गया है, लेकिन उसकी पत्नी को अभी उसकी मौत की खबर नहीं दी गई है.