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मध्य पूर्व के सोलह अमेरिकी ठिकानें ध्वस्त

ईरान के जवाबी हमले से हुआ है अमेरिका को परेशानी

दुबईः सीएनएन की एक नई खोजी रिपोर्ट के अनुसार, ईरान और उसके सहयोगियों द्वारा किए गए हमलों में मध्य पूर्व स्थित कम से कम 16 अमेरिकी सैन्य ठिकाने क्षतिग्रस्त हुए हैं। यह खुलासा इस क्षेत्र में अमेरिका की सुरक्षा व्यवस्था और उसकी भविष्य की उपस्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

इस रिपोर्ट में सैटेलाइट तस्वीरों और अमेरिकी तथा खाड़ी देशों के अधिकारियों के साक्षात्कारों का उपयोग किया गया है। क्षतिग्रस्त हुए ये 16 ठिकाने मध्य पूर्व में अमेरिका की कुल सैन्य उपस्थिति का एक बड़ा हिस्सा हैं। कुछ आधार इतने गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं कि वे अस्थायी रूप से अनुपयोगी हो गए हैं।

ईरान ने रणनीतिक रूप से उन ठिकानों को निशाना बनाया जहाँ अमेरिका के सबसे महंगे और महत्वपूर्ण संसाधन तैनात थे। इसमें आधुनिक रडार इंस्टॉलेशन, सैटेलाइट संचार प्रणालियाँ, महंगे सैन्य विमान और एयर डिफेंस रडार शामिल हैं।

रिपोर्ट में विशेष रूप से कुवैत स्थित कैम्प बर्लिंग का उल्लेख किया गया है, जो अमेरिकी सेना का एक प्रमुख केंद्र है। यह बेस वर्तमान में बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान के कारण बमुश्किल परिचालन की स्थिति में है। पेंटागन के आंतरिक अनुमानों के अनुसार, इस संघर्ष और हमलों से हुए नुकसान की भरपाई में 40 से 50 बिलियन डॉलर का खर्च आ सकता है।

एक अमेरिकी सूत्र ने बताया कि उन्होंने पहले कभी इस स्तर की क्षति नहीं देखी थी। रडार प्रणालियों जैसे संसाधनों को बदलना न केवल खर्चीला है, बल्कि इसमें लंबा समय भी लगता है। खाड़ी देशों के सहयोगियों ने निजी तौर पर वॉशिंगटन की रणनीति पर चिंता व्यक्त की है। एक सऊदी सूत्र के अनुसार, इस युद्ध ने दिखाया है कि अमेरिका के साथ गठबंधन अभेद्य नहीं है।

यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम की स्थिति नाजुक बनी हुई है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के ताजा प्रस्तावों पर विचार कर रहे हैं।