Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Karnal Pradeep Mishra Katha: पंडित प्रदीप मिश्रा की कथा से पहले करनाल में बवाल; VIP पास को लेकर मारप... Indore Weather Update: इंदौर में गर्मी का 10 साल का रिकॉर्ड टूटा! सड़कों पर पसरा सन्नाटा, जानें मौसम... BRICS Summit Indore: इंदौर में ब्रिक्स युवा उद्यमिता बैठक आज से; केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ... Indore Dog Bite Cases: इंदौर में नसबंदी के दावों के बीच श्वानों का आतंक; 1 साल में 60 हजार से ज्यादा... Indore IET Hostel: आईईटी हॉस्टल तोड़फोड़ मामले में नया मोड़, छात्रों ने वीडियो जारी कर मांगी माफी; ख... Indore IET Hostel: आईईटी हॉस्टल गांजा पार्टी मामले में DAVV का बड़ा एक्शन; 3 छात्र सस्पेंड, 1 का एडम... MP New Transfer Policy: मध्य प्रदेश में कर्मचारियों के तबादलों से हटेगी रोक! आज मोहन यादव कैबिनेट बै... Khandwa Congress Leader Honeytrap: लोन ऐप के जरिए मोबाइल में की एंट्री; कांग्रेस नेता के फोटो एआई से... Chhatarpur News: छतरपुर में 'लुटेरी दुल्हन' का कारनामा; ₹1.5 लाख लेकर दलालों ने कराई शादी, 4 दिन बाद... Twisha Sharma Case: ट्विशा शर्मा केस में 'सिज़ोफ्रेनिया' का एंगल; सामने आए भोपाल के मशहूर मनोचिकित्स...

ग्रेट निकोबर परियोजना एक स्कैम हैः राहुल गांधी

इलाके का दौरा करने के बाद नेता प्रतिपक्ष का गंभीर बयान

  • खुद पूरी स्थिति का आकलन किया

  • कॉरपोरेट हित के लिए गलत फैसला

  • प्रकृति और आदिवासियों की अनदेखी

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः वरिष्ठ कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को आरोप लगाया कि कैंपबेल बे में प्रस्तावित ग्रेट निकोबार परियोजना देश की प्राकृतिक और आदिवासी विरासत के खिलाफ सबसे बड़े घोटालों और गंभीर अपराधों में से एक है। लोकसभा में विपक्ष के नेता ने दावा किया कि इस परियोजना के कारण 160 वर्ग किमी के वर्षावन में लाखों पेड़ काट दिए जाएंगे। उन्होंने इसे विकास की भाषा में लिपटी विनाश की योजना करार दिया।

ग्रेट निकोबार की यात्रा के बाद एक सोशल मीडिया पोस्ट में गांधी ने कहा, मैंने आज पूरे ग्रेट निकोबार की यात्रा की। ये मेरे जीवन में देखे गए सबसे असाधारण जंगल हैं। ऐसे पेड़ जो यादों से भी पुराने हैं और जंगल जिन्हें विकसित होने में पीढ़ियां लगीं। इस द्वीप के लोग भी उतने ही सुंदर हैं—चाहे वे आदिवासी समुदाय हों या बसने वाले लोग—लेकिन उनसे वह छीना जा रहा है जो कानूनन उनका है।

उन्होंने आगे कहा, सरकार इसे एक परियोजना कह रही है। मैंने जो देखा वह परियोजना नहीं है। यह लाखों पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलाने की तैयारी है। यह 160 वर्ग किमी के वर्षावन को खत्म करने का फरमान है। यह उन समुदायों की अनदेखी है जिनके घर छीने जा रहे हैं। मैं स्पष्ट रूप से कहूंगा कि जो कुछ भी किया जा रहा है वह हमारे जीवनकाल का सबसे बड़ा घोटाला है। इसे रोका जाना चाहिए, और यह तभी संभव है जब भारत के लोग वह देखें जो मैंने देखा है।

वहीं, केंद्र सरकार का रुख है कि 81,000 करोड़ रुपये की इस परियोजना में एक ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल, पावर प्लांट और टाउनशिप शामिल है, जो समुद्री व्यापार, कनेक्टिविटी और सुरक्षा को बढ़ावा देगी। सरकार के अनुसार, यह भारत के रणनीतिक और आर्थिक हितों के लिए मील का पत्थर साबित होगी।

मंगलवार को राहुल गांधी ने निकोबार जिले के कैंपबेल बे में उन आदिवासी नेताओं से मुलाकात की जो इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं। आदिवासी समुदायों के एक वर्ग ने पारदर्शिता की कमी, पर्यावरणीय जोखिमों और केंद्र द्वारा उनके अधिकारों की कथित उपेक्षा पर चिंता जताई है। गांधी ने केंद्र शासित प्रदेश में कॉर्पोरेट प्रभाव की भी आलोचना की और कहा कि विकास में कॉर्पोरेट हितों के बजाय स्थानीय जरूरतों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।