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मनीष सिसोदिया भी कार्यवाही का बहिष्कार करेंगे

जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत को एक और चुनौती

  • निष्पक्षता का सवाल अनसुलझा है

  • निष्पक्ष न्याय की उपस्थिति नहीं है

  • अंतरात्मा के खिलाफ काम नहीं होगा

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा के समक्ष आबकारी नीति मामले की कार्यवाही में आगे भाग न लेने या बहस न करने का निर्णय लिया है। यह निर्णय आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल द्वारा इसी मामले में न्यायमूर्ति शर्मा के समक्ष कार्यवाही के बहिष्कार के फैसले के तुरंत बाद आया है।

न्यायमुर्ति शर्मा को लिखे पत्र में सिसोदिया ने कहा कि इस मामले में न्यायाधीश की निष्पक्षता को लेकर उनके संदेह अभी भी अनसुलझे हैं। उनके पत्र के अनुसार, न्यायमूर्ति शर्मा का अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद (एबीएपी) के कार्यक्रमों में बार-बार शामिल होना, उनके बच्चों का केंद्र सरकार के पैनल के साथ पेशेवर जुड़ाव और उनके खिलाफ पेश होने वाले सरकारी कानून अधिकारियों के साथ उनकी निकटता उन्हें काफी परेशान करती है।

इससे पहले केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य आरोपियों ने न्यायमूर्ति शर्मा से मामले से हटने (रिक्यूजल) की मांग की थी। हालांकि, न्यायमूर्ति शर्मा ने 20 अप्रैल को उनके आवेदन को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि किसी राजनेता को अविश्वास के बीज बोने की अनुमति नहीं दी जा सकती। सिसोदिया ने अब उस फैसले पर प्रतिक्रिया दी है जिसमें न्यायाधीश ने कहा था कि उनके बच्चों का सरकारी पैनल में होना उनके खिलाफ नहीं माना जा सकता। सिसोदिया का तर्क है कि प्रश्न यह नहीं है कि उनके बच्चे वकालत कर सकते हैं या नहीं, बल्कि यह है कि क्या न्यायाधीश का कर्तव्य नहीं था कि वे केंद्र सरकार के साथ अपने बच्चों के जुड़ाव की परिस्थितियों का खुलासा करें?

सिसोदिया ने पत्र में लिखा कि उनकी चिंता केजरीवाल की तरह ही निष्पक्ष न्याय की उपस्थिति को लेकर है। उन्होंने कहा कि यदि वे इन परिस्थितियों के बावजूद भाग लेना जारी रखते हैं, तो वे अपनी अंतरात्मा के विरुद्ध कार्य करेंगे। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि वे ईमानदारी के साथ इस कार्यवाही का हिस्सा नहीं बन सकते।

यह मामला 2022 में शुरू हुआ था जब सीबीआई ने आरोप लगाया था कि 2021-22 की दिल्ली आबकारी नीति में शराब व्यापार के एकाधिकार की सुविधा के लिए हेरफेर किया गया था। बाद में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया। इसी साल 27 फरवरी को एक ट्रायल कोर्ट ने केजरीवाल और 22 अन्य को बरी कर दिया था, जिसे सीबीआई ने चुनौती दी है और वर्तमान में न्यायमूर्ति शर्मा इसकी सुनवाई कर रही हैं।