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Narayanpur News: नारायणपुर के मरकाबेड़ा में मृत्यु भोज के लिए गोवध, मौके से सींग और मांस बरामद; जांच में जुटी पुलिस

नारायणपुर: मरकाबेड़ा गांव से एक संवेदनशील और विवादित मामला सामने आया है, जहां मृत्यु भोज के दौरान मांस के लिए कथित तौर पर गौवध किए जाने की घटना ने पूरे क्षेत्र में हलचल मचा दी है.

मृत्यु भोज के लिए गौवध

मरकाबेड़ा गांव में एक परिवार की तरफ से मृत्यु भोज का आयोजन किया गया था. इस कार्यक्रम में सामूहिक भोज की तैयारी चल रही थी, जिसके लिए कथित रूप से गौमांस पकाए जाने की व्यवस्था की जा रही थी. बताया जा रहा है कि भोज स्थल पर बोरों में भरकर मांस लाया गया.

गौरक्षा दल ने पुलिस को दी सूचना

मामले का खुलासा तब हुआ जब गौरक्षा दल को इसकी सूचना मिली. गौरक्षा दल ने इसकी सूचना पुलिस को दी. शिकायत के बाद पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची और जांच के दौरान दो गोवंश के कटे हुए अवशेष बरामद किए गए.

सूचना मिली कि मरकाबेड़ा में गौवंश को वध किया गया है. इसकी सूचना पुलिस को दी. गौमांस बरामद हुआ है. दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए – मुकेश चौधरी, गौ रक्षा दल सदस्य

गायता पखना रसम के लिए गौवंश की हत्या

पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ में घर मालिक ने स्वीकार किया कि उसके एक बैल की पहले से मृत्यु हो चुकी थी, जबकि दूसरे बैल को उसने स्वयं मारकर मांस के लिए उपयोग किया.आरोपी का यह भी कहना है कि यह कार्य स्थानीय आदिवासी रीति-रिवाजों के तहत किया गया. जानकारी के मुताबिक, मृतक के नाम पर पत्थर लगाने की पारंपरिक “गायता पखना” रस्म से पहले सामूहिक भोज आयोजित किया जाता है, जिसमें मांसाहार शामिल होता है. इसी परंपरा का हवाला देते हुए गोमांस पकाने की तैयारी की जा रही थी.

गायता पखना के दौरान सभी सगे को भोज पर बुलाया गया. रात को एक बैल मर गया था, दूसरा बैल अकेले किसी काम का नहीं था इसलिए उसको भी भोज में इस्तेमाल किया गया. आदिवासी समाज में बैल मारना प्रतिबंधित है लेकिन हमारे देवी देवता नहीं मानते हैं –रामलाल वड्डे, आरोपी

नारायणपुर पुलिस ने आरोपियों को किया गिरफ्तार

वहीं पूरे मामले पर बोलते हुए नारायणपुर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ऐश्वर्य चंद्राकर ने बताया कि गो वंश (बैल) के मारे जाने की सूचना के आधार पर मरकाबेड़ा में रेड किया गया, जहां से 2 आरोपी रामलाल वड्डे और शोभी वड्डे को गिरफ्तार कर न्यायिक विवेचना में लिया गया है.पशु के अवशेष जैसे सींग और मांस बरामद किए गए हैं. कानूनी कार्यवाही जारी है. मामले मे कृषि पशु परिरक्षा अधिनियम की धारा 4, 5, और 10 तहत कार्रवाई जारी है.

पुलिस ने मौके से बरामद मांस और अवशेषों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम प्रक्रिया शुरू कर दी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि गोवंश की मृत्यु प्राकृतिक थी या हत्या की गई है. पूरे मामले में विधिक कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है.

मरकाबेड़ा का यह मामला जहां एक ओर कानून और धार्मिक संवेदनशीलता से जुड़ा है, वहीं दूसरी ओर यह आदिवासी परंपराओं और आधुनिक कानून के बीच टकराव को भी उजागर करता है. अब देखना होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और प्रशासन इस संवेदनशील मामले में किस प्रकार संतुलन बनाते हुए कार्रवाई करता है.