पवन खेड़ा की याचिका पर आदेश सुरक्षित
बाढ़ के बीच ब्रह्मपुत्र में लापता युवक का शव बरामद
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तीन घंटे तक अदालत में दलीलें सुनी गयी
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बचाव पक्ष ने कहा भागने वाला आदमी नहीं
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सेक्स रैकेट का भंडाफोड़ हुआ गुवाहाटी में
भूपेन गोस्वामी
गुवाहाटीः गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा द्वारा दायर अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुयान शर्मा द्वारा दर्ज कराई गई एक शिकायत से संबंधित है।
न्यायमूर्ति पार्थिव ज्योति सैकिया की पीठ ने तीन घंटे से अधिक समय तक दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। खेड़ा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया कि हिरासत में पूछताछ की कोई आवश्यकता नहीं है और यह मामला राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा है। वहीं, असम के महाधिवक्ता देवजीत लोन सैकिया ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि यह मामला केवल मानहानि तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें धोखाधड़ी, जालसाजी, कई पासपोर्ट रखने और अघोषित विदेशी संपत्ति जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। उन्होंने खेड़ा के देश छोड़कर भागने की संभावना जताते हुए अंतरिम सुरक्षा न देने की अपील की।
असम की राजधानी गुवाहाटी इस समय भीषण प्राकृतिक आपदा का सामना कर रही है। 19 अप्रैल से जारी मूसलाधार बारिश के कारण शहर के कई हिस्से जलमग्न हो गए हैं। बाढ़ और जलभराव से जुड़ी घटनाओं में अब तक चार लोगों की जान जा चुकी है। हालिया मामले में, 21 अप्रैल को ज्योतिकुची में ब्रह्मपुत्र नदी से असीम कलीता नामक युवक का शव बरामद किया गया, जो पिछले दो दिनों से लापता था। लगातार बारिश से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त है; सड़कें नदियों में तब्दील हो गई हैं और रिहायशी इलाकों में पानी भरने से यातायात और दैनिक आपूर्ति बाधित हुई है।
गुवाहाटी पुलिस ने एक बड़े आपराधिक नेटवर्क को ध्वस्त करते हुए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से संचालित एस्कॉर्ट सेवा रैकेट का पर्दाफाश किया है। इस मामले में मुख्य आरोपी अभिरंजन दास सहित तीन लोगों (प्रियंका रे और मीनाक्षी रे) को गिरफ्तार किया गया है। यह गिरोह विशेष रूप से उन छात्राओं को निशाना बनाता था जो शिक्षा के लिए शहर आती थीं और आर्थिक तंगी का सामना कर रही थीं। आरोपियों पर आरोप है कि उन्होंने युवतियों को ब्लैकमेल किया, उनकी आपत्तिजनक तस्वीरें और वीडियो बनाए और उन्हें शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर किया। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि पीड़ितों की लोकेशन ट्रैक की जाती थी और उन्हें निरंतर निगरानी में रखकर उनकी स्वतंत्रता को प्रतिबंधित किया जाता था। फिलहाल पुलिस नेटवर्क के अन्य पीड़ितों और सहयोगियों की पहचान करने में जुटी है।