इस्लामाबाद की बैठक से सकारात्मक संकेत मिलने लगे
-
गतिरोध खत्म करने की पहल हुई
-
कतर की संपत्तियां वापस मिलेंगी
-
बैंक में जब्त पैसों की वापसी होगी
एजेंसियां
दुबई: ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से जारी आर्थिक और कूटनीतिक गतिरोध को कम करने की दिशा में एक बड़ी सफलता मिलने के संकेत मिल रहे हैं। शनिवार को एक वरिष्ठ ईरानी सूत्र ने जानकारी दी कि संयुक्त राज्य अमेरिका कतर और अन्य विदेशी बैंकों में फ्रोजन ईरानी संपत्ति को मुक्त करने के लिए सहमत हो गया है। ईरान ने इस कदम का स्वागत करते हुए इसे वाशिंगटन के साथ इस्लामाबाद में चल रही वार्ता में गंभीरता दिखाने का एक सकारात्मक संकेत बताया है।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए नाम न छापने की शर्त पर एक सूत्र ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि इन संपत्तियों को मुक्त करने का निर्णय सीधे तौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने से जुड़ा है। विश्व के तेल व्यापार के लिए यह जलमार्ग सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है और इस्लामाबाद वार्ता में यह एक प्रमुख मुद्दा बनकर उभरने वाला है। ईरान का मानना है कि इस वित्तीय बाधा के हटने से दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी को पाटने में मदद मिलेगी।
दिलचस्प बात यह है कि जहाँ ईरानी पक्ष इस प्रगति को लेकर उत्साहित है, वहीं संयुक्त राज्य अमेरिका ने संपत्तियों को अनफ्रीज करने के मुद्दे पर अभी तक कोई आधिकारिक सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है। वाशिंगटन आमतौर पर इस तरह के संवेदनशील सौदों को तब तक गोपनीय रखता है जब तक कि सभी सुरक्षा और कूटनीतिक शर्तें पूरी न हो जाएं।
इस्लामाबाद में हो रही यह चर्चा न केवल द्विपक्षीय संबंधों के लिए, बल्कि मध्य पूर्व की स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि ईरान की ये संपत्तियाँ मुक्त हो जाती हैं, तो ईरान की अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत मिलेगी, जो अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण पिछले कई वर्षों से दबाव में है। इसके बदले में, अमेरिका उम्मीद कर रहा है कि ईरान समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के प्रति अधिक सहयोगात्मक रुख अपनाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि मेक-ऑर-ब्रेक (बने या बिगड़े) वाली इस बातचीत में यह वित्तीय समझौता एक गेम चेंजर साबित हो सकता है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस्लामाबाद पर टिकी हैं, जहाँ आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि क्या अमेरिका वाकई में इन जमी हुई संपत्तियों को रिहा कर ईरान के साथ एक स्थायी समझौते की ओर कदम बढ़ा रहा है।