590 करोड़ रुपये का आईडीएफसी फर्स्ट बैंक घोटाला की जांच जारी
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दोनों की संपत्तियों की भी जांच हुई है
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अभियुक्तों के साथ गहरा लगाव रहा है
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जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है
राष्ट्रीय खबर
चंडीगढ़: हरियाणा सरकार ने गुरुवार को एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों, राम कुमार सिंह और प्रदीप कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इन अधिकारियों पर 590 करोड़ रुपये के बहुचर्चित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक घोटाले में कथित संलिप्तता का आरोप है। इस घोटाले की जांच जैसे-जैसे गहराती जा रही है, ये दोनों अधिकारी इस मामले में गाज गिरने वाले पहले उच्च पदस्थ सरकारी कर्मचारी बन गए हैं।
उच्च पदस्थ सूत्रों ने पुष्टि की है कि हरियाणा राज्य सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा की जा रही जांच में इन दोनों अधिकारियों के नाम सामने आए हैं। जांच में यह पाया गया है कि इन आईएएस अधिकारियों के संबंध उन अन्य आरोपियों से थे, जिन्हें पुलिस इस मामले में पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। यह घोटाला सरकारी धन के दुरुपयोग और बैंकिंग नियमों के उल्लंघन से जुड़ा है, जिसने राज्य के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।
करोड़ों की संपत्ति का खुलासा सरकारी रिकॉर्ड और संपत्तियों के ब्योरे से इन अधिकारियों की वित्तीय स्थिति को लेकर चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
2012 बैच के आईएएस अधिकारी राम कुमार सिंह के पास कथित तौर पर 3.22 करोड़ रुपये की संपत्ति है, जिससे उन्हें सालाना 19 लाख रुपये की आय प्राप्त होती है। दूसरी ओर, 2011 बैच के आईएएस अधिकारी प्रदीप कुमार की अपनी पत्नी के साथ संयुक्त संपत्ति का मूल्य 7.03 करोड़ रुपये आंका गया है। इतनी बड़ी चल-अचल संपत्ति और बैंक घोटाले में इनके नाम आने के बाद सतर्कता ब्यूरो ने अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है।
राज्य सरकार ने इन निलंबनों के माध्यम से स्पष्ट संदेश दिया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए वित्तीय अनियमितताओं को बढ़ावा दिया। आने वाले दिनों में सतर्कता ब्यूरो इन अधिकारियों से पूछताछ कर सकती है ताकि इस 590 करोड़ रुपये के घोटाले की परतों को और अधिक स्पष्ट किया जा सके। फिलहाल, यह मामला हरियाणा की राजनीति और प्रशासन में चर्चा का मुख्य केंद्र बना हुआ है।