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भारतीय सेना को मिले सैकड़ों सुसाइड ड्रोन

शून्य से 35 डिग्री नीचे के तापमान में भी काम करेंगे

  • हिमालय के इलाके में कारगर होंगे

  • उड़ने में इनका शोर भी बहुत कम है

  • घुसपैठियों पर लगातार निगरानी रखेंगे

राष्ट्रीय खबर

अहमदाबादः भारतीय सेना ने अपनी मारक क्षमता को बढ़ाते हुए गुजरात स्थित एक रक्षा फर्म से सैकड़ों की संख्या में स्वदेशी सुसाइड ड्रोन (लोइटरिंग मूनिशन) प्राप्त किए हैं। ये ड्रोन विशेष रूप से हिमालयी क्षेत्रों की अत्यधिक विषम परिस्थितियों, जैसे कि माइनस 35 डिग्री सेल्सियस तक के कड़ाके के तापमान में भी प्रभावी ढंग से काम करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।

इन ड्रोनों की सबसे बड़ी विशेषता इनकी कामिकेज़ क्षमता है, जिसके तहत ये हवा में दुश्मन की टोह लेते हुए मंडराते रहते हैं और लक्ष्य की पहचान होते ही विस्फोटक के साथ उससे टकराकर उसे नष्ट कर देते हैं। ये ड्रोन मिनस 35 डिग्री  से लेकर 55 डिग्री तक के तापमान में उड़ान भर सकते हैं, जो इन्हें लद्दाख और सियाचिन जैसे ऊंचाई वाले युद्ध क्षेत्रों के लिए अत्यंत उपयुक्त बनाता है।

जीपीएस-आधारित नेविगेशन की मदद से ये ड्रोन 2 मीटर की सटीकता के साथ दुश्मन के ठिकानों, आतंकी लॉन्च पैड्स और घुसपैठियों को निशाना बना सकते हैं। यदि मिशन के दौरान लक्ष्य नहीं मिलता या हमला रद्द करना पड़ता है, तो इन ड्रोनों को सुरक्षित वापस बुलाकर दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। इन ड्रोनों में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जो आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत रक्षा क्षेत्र में बढ़ती मजबूती को दर्शाता है।

इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम के कारण इनका शोर बहुत कम होता है, जिससे 200 मीटर से अधिक की ऊंचाई पर इन्हें पकड़ पाना दुश्मन के लिए लगभग असंभव हो जाता है। भारतीय सेना द्वारा इन घातक ड्रोनों का समावेश सीमाओं पर, विशेषकर चीन और पाकिस्तान से लगी एलएसी और एलओसी पर निगरानी और सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ करेगा।