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नशे ने उजाड़ दी एक मां की दुनिया! 4 बेटों की अर्थी उठाई, अब 5वें की आखिरी सांसें; पंजाब की सबसे दुखद कहानी

Kapurthala News: पंजाब में नशे के खात्मे के सरकारी दावों की धज्जियां उड़ाती एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसे देखकर पत्थर दिल भी पसीज जाए. सुल्तानपुर लोधी के पंडोरी मोहल्ले से आई चीखें न केवल प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर रही हैं. बल्कि समाज के उस काले सच को भी उजागर कर रही हैं, जिसे अक्सर फाइलों में दबा दिया जाता है. यहां एक बेबस मां की कहानी ने पूरे पंजाब को झकझोर कर रख दिया है, जिसने नशे के दैत्य के कारण अपने चार जवान बेटों को खो दिया और अब उसका पांचवां बेटा भी मौत से जंग लड़ रहा है.

नीले रंग का दुपट्टा ओढ़े, आंखों में समंदर जैसा दर्द लिए संतोष कुमारी (काल्पनिक नाम) की सिसकियां थमने का नाम नहीं ले रही हैं. संतोष उन बदनसीब माताओं में से हैं जिन्होंने अपनी आंखों के सामने अपने भरे-पूरे परिवार को उजड़ते देखा है. पिछले 3-4 वर्षों के भीतर उनके चार नौजवान बेटे चिट्टे (नशे) की भेंट चढ़ गए.

संतोष बताती हैं, ‘मैं पांच बेटों की मां थी… चार को तो नशे ने मुझसे छीनकर श्मशान पहुंचा दिया. अब मेरा पांचवां और आखिरी बेटा भी बिस्तर पर पड़ा है, डॉक्टरों ने जवाब दे दिया है. तीन दिन से घर में चूल्हा नहीं जला, क्योंकि खिलाने वाला कोई नहीं और खाने वाला कोई बचा नहीं.’ यह सिर्फ एक महिला का दर्द नहीं, बल्कि पंडोरी मोहल्ले के हर दूसरे घर की कहानी बन चुकी है.

ऐसे बिक रहा मौत का सामान

सबसे चौंकाने वाला और गंभीर आरोप यह है कि यह नशे का कारोबार किसी सुनसान इलाके में नहीं, बल्कि सुल्तानपुर लोधी थाने के बिल्कुल बगल में चल रहा है. मोहल्ले की महिलाओं का कहना है कि तस्कर इतने बेखौफ हैं कि वे मुंह ढककर मोटरसाइकिलों पर आते हैं और थाने के आसपास ही ‘चिट्टे’ की पुड़िया बेचकर फरार हो जाते हैं.

स्थानीय निवासियों का कहना है कि नशा अब गलियों तक पहुंच चुका है. युवा नशे की लत को पूरा करने के लिए घर के बर्तन और कीमती सामान तक बेच रहे हैं. जब ‘बाबा नानक की नगरी’ कहे जाने वाले इस पवित्र स्थान पर पुलिस स्टेशन के पास ही नशा सरेआम बिक रहा हो, तो आम जनता की सुरक्षा और सरकार के “नशे के खिलाफ युद्ध” के दावों पर सवाल उठना लाजिमी है.

‘हमारे बेटे चले गए, मासूम पोतों को बचा लो’

मोहल्ले की कई अन्य महिलाएं भी सामने आईं, जिनकी आपबीती सुनकर कलेजा मुंह को आता है. किसी ने अपना इकलौता सहारा खोया है तो किसी के दो बेटे नशे की भेंट चढ़ गए. एक बुजुर्ग महिला ने अपने छोटे-छोटे पोतों की ओर इशारा करते हुए रुंधे गले से कहा, “प्रशासन से गुहार है कि हमारे बेटे तो चले गए, अब कम से कम इन मासूमों को बचा लो. अगर नशा इसी तरह बिकता रहा, तो अगली पीढ़ी का नामोनिशान मिट जाएगा.”

‘खुद ही पकड़ लो तस्करों को’

जब मोहल्ले में चीख-पुकार और मीडिया का जमावड़ा बढ़ा, तो बगल के थाने से कुछ पुलिस अधिकारी भी मौके पर पहुंचे. लेकिन राहत या सख्त कार्रवाई का भरोसा देने के बजाय, पुलिस का रवैया नसीहत देने वाला रहा. एएसआई सुबेग सिंह और अन्य अधिकारियों ने मोहल्ला वासियों को यह कहकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की और कहा- आप सब इकट्ठा होकर खुद ही नशा तस्करों को पकड़ें और माताएं अपने बच्चों को नशा करने से रोकें. हालांकि, बाद में पुलिस ने दावा किया कि इलाके में पेट्रोलिंग बढ़ा दी गई है, लेकिन स्थानीय लोगों का विश्वास कानून व्यवस्था से पूरी तरह उठ चुका है. उन्हें डर है कि पुलिस की यह सक्रियता सिर्फ कुछ घंटों की है.

नशे का तांडव और सामाजिक ढांचा

पंडोरी मोहल्ले की यह स्थिति दिखाती है कि नशा सिर्फ एक व्यक्ति को नहीं मारता, बल्कि पूरे परिवार के आर्थिक और सामाजिक ढांचे को ध्वस्त कर देता है. जिन घरों में नौजवानों की किलकारियां गूंजनी चाहिए थीं, वहां अब सिर्फ बुजुर्गों का रुदन और अनाथ बच्चों का सूनापन बचा है. नशे की इस आग ने न केवल रोजगार और खुशहाली छीनी है, बल्कि परिवारों को कर्ज के दलदल में भी धकेल दिया है.