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पूर्वी कांगो में 43 से अधिक की हत्या की गयी

इस्लामिक स्टेट से जुड़े विद्रोहियों का फिर से हमला

गोमा (कांगो): अफ्रीकी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो के अशांत पूर्वी हिस्से से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। अधिकारियों द्वारा गुरुवार को साझा की गई जानकारी के अनुसार, इस्लामिक स्टेट समूह से संबद्ध विद्रोहियों ने एक भीषण हमले में कम से कम 43 नागरिकों की हत्या कर दी है। इस हमले ने क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और शांति प्रयासों पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

यह हमला बुधवार की रात बाफवाकोआ गाँव में हुआ। हमलावर एलाइड डेमोक्रेटिक फोर्सेस के लड़ाके थे, जो युगांडा मूल का एक कट्टरपंथी इस्लामवादी समूह है। स्थानीय नागरिक समाज के सदस्य सैमुअल बनापिया ने फोन पर बताया कि विद्रोहियों ने न केवल अंधाधुंध गोलीबारी की, बल्कि गाँव के घरों में आग भी लगा दी, जिससे कई लोग जिंदा जल गए या मलबे में दब गए। कांगो की सेना ने अपने आधिकारिक बयान में 43 मौतों की पुष्टि की है, जबकि स्थानीय अधिकारियों का अनुमान है कि यह संख्या 56 से अधिक हो सकती है। कई लोग अभी भी लापता हैं और कम से कम दो लोगों के अपहरण की खबर है।

इस एडीएफ की जड़ें 1990 के दशक के उत्तरार्ध में युगांडा में मिलती हैं। शुरुआत में यह युगांडा सरकार के विरोध में बना था, लेकिन धीरे-धीरे इसने कांगो की खुली सीमाओं का लाभ उठाकर वहां अपना आधार जमा लिया। साल 2019 में इस समूह ने आधिकारिक तौर पर इस्लामिक स्टेट के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त की थी। पूर्वी कांगो में इनकी उपस्थिति बेहद घातक रही है, जहाँ ये अक्सर निहत्थे नागरिकों को निशाना बनाते हैं। हालांकि कांगो की लगभग 10 फीसद आबादी मुस्लिम है और अधिकांश पूर्व में रहती है, लेकिन एडीएफ के चरमपंथी विचार आम जनता के लिए निरंतर खतरा बने हुए हैं।

कांगो की सेना वर्तमान में कई मोर्चों पर संघर्ष कर रही है। एक ओर उसे एडीएफ जैसे आतंकी समूहों का सामना करना पड़ रहा है, तो दूसरी ओर एम 23 जैसे शक्तिशाली विद्रोही समूहों से निपटना पड़ रहा है, जिसे कथित तौर पर रवांडा का समर्थन प्राप्त है। पूर्वी कांगो के सैन्य प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जूल्स न्गोंगो ने स्पष्ट किया कि एडीएफ सीधे सेना से लड़ने के बजाय नागरिकों पर हमला कर शांति प्रयासों को बाधित करने की रणनीति अपनाता है। उन्होंने इसे जनता के खिलाफ प्रतिशोध की कार्रवाई करार दिया है। हाल के वर्षों में यह हिंसा इतुरी प्रांत और गोमा शहर जैसे प्रमुख केंद्रों तक फैल गई है, जिससे पूरे क्षेत्र में मानवीय संकट गहरा गया है।