विदेश सचिव विक्रम मिस्त्री भी इसमें शामिल हुए
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्ली: वैश्विक ऊर्जा और उर्वरक आपूर्ति के लिए जीवन रेखा माने जाने वाले स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के बंद होने से उपजे संकट पर भारत ने अपनी गंभीर चिंता व्यक्त की है। गुरुवार को ब्रिटेन द्वारा बुलाई गई 30 से अधिक देशों की एक महत्वपूर्ण आपातकालीन बैठक में भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने वर्चुअली हिस्सा लिया। ब्रिटिश गृह सचिव यवेट कूपर की अध्यक्षता में हुई इस बैठक का मुख्य उद्देश्य इस सामरिक जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के रास्ते तलाशना और समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करना था।
इस बैठक में फ्रांस, जर्मनी, इटली, कनाडा और संयुक्त अरब अमीरात जैसे प्रमुख देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। हालांकि, विशेष बात यह रही कि अमेरिका इस बैठक में शामिल नहीं हुआ। यह बैठक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस टेलीविजन संबोधन के कुछ ही घंटों बाद हुई, जिसमें उन्होंने कहा था कि इस सामरिक जलमार्ग को सुरक्षित करना अन्य देशों की समस्या है और उन्हें ही इसका समाधान ढूंढना चाहिए। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक ब्रीफिंग में स्पष्ट किया कि भारत अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप मुक्त और खुले वाणिज्यिक नौवहन और समुद्री सुरक्षा का पुरजोर समर्थन करता है।
भारत के लिए स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज का महत्व इस तथ्य से समझा जा सकता है कि देश के कुल तेल आयात का 50 फीसद इसी रास्ते से आता है। वर्तमान में, भारत का ध्यान उन 18 भारतीय ध्वज वाले जहाजों पर है, जिनमें तेल और गैस वाहक शामिल हैं, साथ ही ऊर्जा उत्पादों से लदे 10 विदेशी जहाज भी हैं जो वर्तमान में इस जलडमरूमध्य के पश्चिम में फंसे हुए हैं। जायसवाल ने बताया कि पिछले कुछ दिनों की बातचीत के परिणामस्वरूप छह भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से हॉर्मुज पार करने में सफल रहे हैं। ईरानी पक्ष वर्तमान में केस-दर-केस (मामले दर मामले) आधार पर भारतीय जहाजों को गुजरने की अनुमति दे रहा है।
मामले से परिचित लोगों का कहना है कि ब्रिटेन द्वारा बुलाई गई इस बैठक से किसी तत्काल बड़े समाधान की उम्मीद कम है। इस जलमार्ग में बिछाई गई समुद्री सुरंगों के कारण जहाजों का गुजरना बेहद जोखिम भरा है। भारतीय जहाजों के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करना एक जटिल मामला बना हुआ है, जिसके लिए ईरानी पक्ष के साथ निरंतर और गहन समन्वय की आवश्यकता है ताकि एलपीजी और एलएनजी जैसे आवश्यक उत्पादों की आपूर्ति बाधित न हो। भारत लगातार हॉर्मुज के माध्यम से निर्बाध और सुरक्षित पारगमन को प्राथमिकता देने का आह्वान कर रहा है, क्योंकि यह सीधे तौर पर देश की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा विषय है।