Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
ज्यादा तनावमुक्त रहना भी खतरे की घंटी है खुद में, देखें वीडियो 1984 सिख-विरोधी दंगों के दोषी पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार का 80 साल की उम्र में निधन, तिहाड़ से... राजीव गांधी की जयंती पर PM मोदी ने दी श्रद्धांजलि, सोनिया-राहुल और खरगे ने 'वीर भूमि' पर अर्पित किए ... 'वंदे मातरम्' पर सियासी घमासान: अमित शाह बोले- 2 छंद गाने का कांग्रेस का फैसला देश विरोधी, वेणुगोपाल... तेलंगाना के सिद्दिपेट में भीषण सड़क हादसा: 20 फीट गहरे कुएं में गिरी कार, एक ही परिवार के 4 लोगों की... उत्तराखंड में PMAY-U को मिली नई रफ्तार, दिसंबर तक 15 हजार परिवारों को मिलेगी पक्की छत प्रयागराज में भारी बारिश से हाहाकार: सड़कों पर भरा पानी, जलभराव पर इलाहाबाद हाई कोर्ट सख्त; DM और नग... हमीरपुर में फूड रेड के दौरान हड़कंप: SDM के कहने पर दुकानदार ने अपनी ही दुकान की मिठाई खाने से किया ... गोमतीनगर में दिल दहला देने वाला तिहरा हत्याकांड: पत्नी और बहन की हत्या के बाद मैनेजर ने की खुदकुशी दिल्ली मास्टर प्लान-2047 को केंद्र की मंजूरी: 40 लाख नए फ्लैट्स, नरेला एजुकेशन हब और मेट्रो विस्तार ...

जेपी एसोसियेट्स की बिक्री पर वेदांता का सनसनीखेज दावा

हम जीते थे लेकिन फैसला बदला गयाः अनिल अग्रवाल

  • फैसले को चुनौती देने का एलान

  • सरकारी फैसला अडानी के पक्ष में

  • सार्वजनिक एलान के बाद ऐसा हुआ

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: वेदांता रिसोर्सेज लिमिटेड के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने रविवार को कहा कि उनकी कंपनी को जयप्रकाश एसोसिएट्स के लिए सबसे बड़ा बोलीदाता घोषित किया गया था, लेकिन बाद में परिणाम को उलट दिया गया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में अग्रवाल ने संकेत दिया कि वेदांता इस समाधान प्रक्रिया को कानूनी चुनौती देगा और अपना पक्ष उचित माध्यमों से पेश करेगा।

अग्रवाला के अनुसार, यह बोली दिवाला और दिवालियापन संहिता के तहत लेनदारों की समिति द्वारा आयोजित एक सार्वजनिक नीलामी के माध्यम से हुई थी। उन्होंने बताया कि कई बोलीदाताओं ने प्रक्रिया में भाग लिया, जिसके बाद वेदांता सबसे बड़ी बोलीदाता के रूप में उभरी। उन्होंने कहा, हमें सार्वजनिक रूप से उच्चतम बोलीदाता घोषित किया गया था। यह एक पारदर्शी प्रक्रिया थी और हमें लिखित में सूचित किया गया था कि हम जीत गए हैं। हालांकि, कुछ दिनों बाद यह फैसला बदल दिया गया।

अग्रवाल ने इस घटनाक्रम को जयप्रकाश गौड़ (जेपी संस्थापक) के साथ अपनी एक पुरानी मुलाकात से जोड़ा। उन्होंने बताया कि सालों पहले गौड़ ने लंदन में उनसे मुलाकात की थी और इच्छा जताई थी कि उनके द्वारा बनाया गया व्यवसाय सुरक्षित हाथों में जाए। अग्रवाल ने कहा कि उस समय वेदांता आगे नहीं बढ़ी थी, लेकिन जब यह संपत्ति दिवाला प्रक्रिया में आई, तो अवसर फिर से सामने आया।

इस मामले पर वेदांता का रुख स्पष्ट करते हुए अग्रवाल ने गीता के उपदेशों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कंपनी बिना किसी मोह के इस मामले को आगे बढ़ाएगी। उन्होंने जोर देकर कहा, जब धर्म में कुछ वादा किया जाता है, तो उसे वापस नहीं लिया जाना चाहिए।

यह बयान तब आया है जब वेदांता ने जयप्रकाश एसोसिएट्स के लिए अडानी एंटरप्राइजेज की प्रतिद्वंद्वी बोली को मिली मंजूरी को चुनौती दी है। इस महीने की शुरुआत में, वेदांता ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल के आदेश के खिलाफ अपीलीय न्यायाधिकरण का दरवाजा खटखटाया था। एनसीएलटी की इलाहाबाद पीठ ने 17 मार्च को अडानी एंटरप्राइजेज की 14,535 करोड़ रुपये की समाधान योजना को मंजूरी दी थी। हालांकि वेदांता की कुल बोली लगभग 16,000 करोड़ रुपये की थी, लेकिन समझा जाता है कि ऋणदाताओं ने अडानी के प्रस्ताव को प्राथमिकता दी क्योंकि उसमें 6,000 करोड़ रुपये का अग्रिम भुगतान और भुगतान की अवधि कम थी।