चुनाव के बाद दाम बढ़ाने की तैयारी में सरकार
राष्ट्रीय खबर
बेंगलुरुः कर्नाटक में सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी ने शुक्रवार को केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोलियम ईंधन पर उत्पाद शुल्क में की गई कटौती को महज कागजी खानापूर्ति करार दिया है। पार्टी का आरोप है कि यह कदम तेल कंपनियों को अपना बोझ सरकार और अंततः जनता पर डालकर मुनाफा कमाने में मदद करने के लिए उठाया गया है।
जारी एक संयुक्त बयान में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और एआईसीसी महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार आगामी विधानसभा चुनावों के तुरंत बाद गैस, डीजल और पेट्रोल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी करने की तैयारी कर रही है।
नेताओं ने तर्क दिया, चूंकि पश्चिम एशिया संकट गहराता जा रहा है, नायरा एनर्जी (पूर्व में एस्सार) ने पेट्रोल की कीमत में 5.30 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी है। यह पेट्रोल-डीजल-गैस की कीमतों में होने वाली आसन्न वृद्धि का पूर्वाभ्यास है, क्योंकि भाजपा सरकार 9 और 23 अप्रैल, 2026 को पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के संपन्न होने का इंतजार कर रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार उत्पाद शुल्क में कटौती की घोषणा करके केवल लोगों को मूर्ख बनाने की कोशिश कर रही है।
11 वर्षों का लेखा-जोखा कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि पिछले 11 वर्षों में मोदी सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर कर लगाकर 43 लाख करोड़ रुपये एकत्र किए हैं। उनके अनुसार, यह 2014 से हर दिन लगभग 1,000 करोड़ रुपये की वसूली के बराबर है।
बयान में तुलना करते हुए कहा गया कि 26 मई, 2014 को यूपीए शासन के दौरान पेट्रोल 71.41 और डीजल 56.71 रुपये प्रति लीटर था। वर्तमान में बेंगलुरु में पेट्रोल 102.96 और डीजल 90.99 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। तीनों नेताओं ने दावा किया कि यदि 2014 की कच्चे तेल की कीमतों (108 प्रति डॉलर बैरल) और पश्चिम एशिया युद्ध से पहले की कीमतों (70 डॉलर प्रति बैरल) के आधार पर गणना की जाए, तो पेट्रोल 61.60 और डीजल 56.99 रुपये प्रति लीटर होना चाहिए था।
उन्होंने शेष राशि को भाजपा द्वारा की गई सरासर लूट बताया। इसी तरह, एलपीजी सिलेंडर की कीमत मई 2014 में ₹412 से बढ़कर मार्च 2026 में 913 रुपये हो गई है। इन नेताओं ने तर्क दिया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एलपीजी की कीमतें 2013-14 के मुकाबले मार्च 2026 में लगभग 38.5 फीसद कम होने के बावजूद घरेलू कीमतों में 121.6 प्रतिशत की भारी वृद्धि हुई है।