रामनवमी के बाद सरकार को भी लगेगा बिजली का झटका
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जनता पर अतिरिक्त बोझ, सियासत गरम
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उद्योग और सौर ऊर्जा पर दांव
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राहत के बीच छिपे कई सवाल
राष्ट्रीय खबर
रांची: झारखंड में भीषण गर्मी की दस्तक के साथ ही राजनीति का पारा भी चढ़ने लगा है। झारखंड राज्य विद्युत विनियामक आयोग ने बुधवार को बिजली दरों में बढ़ोतरी का एलान कर विपक्षी दलों को सरकार को घेरने का एक नया मुद्दा थमा दिया है। 1 अप्रैल से प्रभावी होने वाली यह नई दरें न केवल उपभोक्ताओं की जेब ढीली करेंगी, बल्कि आने वाले दिनों में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी का केंद्र भी बनेंगी।
झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड की मांग पर आयोग ने बिजली दरों में 6.12 फीसद की औसत वृद्धि को मंजूरी दी है। शहरी क्षेत्रों में घरेलू उपभोक्ताओं को अब 6.85 रुपये के बजाय 7.4 रुपये प्रति यूनिट का भुगतान करना होगा। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में भी दरें 6.7 रुपये से बढ़कर 7.2 रुपये प्रति यूनिट हो गई हैं।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सरकार ने एक तरफ अबुआ आवास और अन्य लोक-लुभावन योजनाओं से जनता को साधने की कोशिश की है, वहीं दूसरी ओर बिजली की कीमतों में इजाफा कर मध्यम वर्ग और गरीबों को तगड़ा झटका दिया है। विपक्ष इस मुद्दे को जनविरोधी करार देते हुए सड़क पर उतरने की तैयारी में है, जबकि सरकार इसे ढांचागत सुधार और बिजली आपूर्ति को बेहतर बनाने की दिशा में एक आवश्यक कदम बता रही है।
आयोग ने पहली बार बड़े संस्थानों जैसे अस्पतालों और शॉपिंग मॉल के लिए एक अलग कमर्शियल हाई-टेंशन श्रेणी बनाई है, जिसकी दर 8 रुपये प्रति केवीएएच रखी गई है। दिलचस्प यह है कि आयोग ने जेवीएनएल के 59 फीसद बढ़ोतरी के भारी-भरकम प्रस्ताव को खारिज कर केवल 6.12 फीसद की वृद्धि की है। इसे सरकार की एक रणनीतिक चाल के रूप में देखा जा रहा है ताकि जनता का गुस्सा कम रहे।
ईवी चार्जिंग और सोलर एनर्जी की दरों में कटौती कर सरकार ने ग्रीन एनर्जी का कार्ड खेलने की कोशिश की है। रूफटॉप सोलर के लिए 3.8 रुपये से 4.16 रुपये की दरें तय की गई हैं, जिसे पर्यावरण प्रेमियों और शहरी मतदाताओं को लुभाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
आयोग के अध्यक्ष (सेवानिवृत्त) जस्टिस नवनीत कुमार ने मीटर रेंट खत्म करने और समय पर बिल भुगतान पर 2 फीसद की छूट का ऐलान कर मरहम लगाने की कोशिश की है। स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने वालों को 3 फीसद की अतिरिक्त छूट मिलेगी। हालांकि, विपक्षी खेमे का कहना है कि बिजली बिलों पर शिकायत निवारण फोरम का ब्यौरा देने के निर्देश महज औपचारिकता हैं, क्योंकि राज्य में बुनियादी ढांचे की स्थिति अब भी जर्जर है। अब देखना यह होगा कि क्या 1 अप्रैल से लागू होने वाली ये दरें झारखंड की राजनीति में कोई नया करंट पैदा करती हैं या जनता इसे व्यवस्था सुधार के नाम पर स्वीकार कर लेती है।