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मंदिर के सामान्य कतार में लगे चंद्रबाबू नायडू

पोते देवांश के जन्मदिन पर सादगी की मिसाल

राष्ट्रीय खबर

हैदराबादः मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने महा द्वार दर्शन के वीवीआईपी विशेषाधिकार के बजाय सामान्य भक्तों के साथ कतार परिसर से दर्शन करना चुना। उन्होंने अपनी जान बचाने के लिए सात पहाड़ियों के देवता (इलावेल्पु) के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अलीपिरी बम विस्फोट के बाद यह उनका पुनर्जन्म है। जन्मदिन के अवसर पर नायडू परिवार ने अन्नदानम ट्रस्ट को ₹44 लाख का दान दिया और स्वयं परोसकर श्रद्धालुओं को भोजन कराया।

शनिवार को तिरुमला में आस्था और सादगी का एक अनूठा उदाहरण पेश किया। अपने पोते देवांश के जन्मदिन के अवसर पर परिवार के साथ भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन के लिए पहुंचे नायडू ने वीवीआईपी के लिए आरक्षित महा द्वार दर्शन की सुविधा का उपयोग करने के बजाय सामान्य कतार परिसर के माध्यम से जाना पसंद किया। एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, मुख्यमंत्री ने सभी प्रोटोकॉल को एक तरफ रखकर आम भक्तों के साथ कतार में लगकर दर्शन किए, जिसे उन्होंने भगवान के सामने सबकी समानता का प्रतीक बताया।

मुख्यमंत्री अक्सर अलीपिरी में हुए बम विस्फोट की घटना का जिक्र करते हुए भगवान वेंकटेश्वर को अपना इलावेल्पु (कुलदेवता) मानते हैं। उन्होंने उस जानलेवा हमले में जीवित बचने को अपना पुनर्जन्म माना और इसका श्रेय भगवान में अपने परिवार की अटूट आस्था को दिया। ब्रह्माोत्सवम के दौरान पट्टू वस्त्रम (रेशमी कपड़े) की औपचारिक प्रस्तुति को छोड़कर, नायडू अक्सर सामान्य कतार प्रणाली का उपयोग करते हैं। इससे उन्हें न केवल आम लोगों के करीब रहने का मौका मिलता है, बल्कि वे भक्तों को दी जाने वाली सुविधाओं का भी प्रत्यक्ष निरीक्षण कर पाते हैं।

देवांश के जन्मदिन को यादगार बनाने के लिए नायडू परिवार ने तारिगोंडा वेंगामंबा अन्नदानम ट्रस्ट को ₹44 लाख की राशि दान की। दर्शन के पश्चात, मुख्यमंत्री अपने परिवार के साथ मंदिर से मातृश्री तारिगोंडा वेंगामंबा अन्नप्रसाद परिसर तक पैदल गए और वहां मौजूद श्रद्धालुओं को स्वयं भोजन परोसा। मुख्यमंत्री और उनके पुत्र व मानव संसाधन विकास मंत्री नारा लोकेश ने व्यक्तिगत रूप से गलियारे में घूमकर नाश्ते के लिए बैठे भक्तों को भोजन परोसा, जो उनकी जन-सेवा की भावना को दर्शाता है।

मंदिर परिसर में सुरक्षा प्रोटोकॉल को दरकिनार करते हुए मुख्यमंत्री ने वहां मौजूद उत्साहित श्रद्धालुओं की ओर बढ़कर उनसे हाथ मिलाया और बातचीत की। भक्तों ने भी उत्साहपूर्वक नन्हे देवांश को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री का यह व्यवहार न केवल उनकी धार्मिक निष्ठा को उजागर करता है, बल्कि एक संवेदनशील नेता के रूप में उनकी छवि को भी मजबूत करता है जो भगवान के दरबार में खुद को एक सामान्य भक्त ही मानते हैं।