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भ्रष्टाचार विरोधी प्रमुख को नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया

मेडागास्कर में राष्ट्रपति का कैबिनेट भंग करने के बाद फैसला

अंतानानारिवोः मेडागास्कर के राष्ट्रपति माइकल रैंड्रियानिरिना ने, जिन्होंने पिछले साल अक्टूबर में सत्ता संभाली थी, देश के भ्रष्टाचार विरोधी प्रमुख को नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया है। यह नियुक्ति कैबिनेट को भंग करने के महज एक सप्ताह बाद की गई है। राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा रविवार को जारी बयान के अनुसार, मैमिटियाना राजोनारिसन नए सरकार के प्रमुख होंगे। राजोनारिसन एक पूर्व वरिष्ठ जेंडरमेरी (सैन्य पुलिस) अधिकारी और अनुभवी नागरिक प्रशासक रहे हैं।

कर्नल रैंड्रियानिरिना ने पिछले साल सत्ता संभालने के बाद सुधारों की एक श्रृंखला शुरू करने का वादा किया था। उन्होंने कहा कि राजोनारिसन सरकार को स्वच्छ मार्ग पर ले जाएंगे और जनता में आशा की बहाली करेंगे। राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह के दौरान, जिसका राज्य टेलीविजन पर सीधा प्रसारण किया गया, रैंड्रियानिरिना ने कहा, मेडागास्कर राष्ट्र को साहसी निर्णयों की आवश्यकता है। हम अब एक महत्वपूर्ण मोड़ पर हैं। उन्होंने आगे जोर देते हुए कहा कि देश को एक ऐसे व्यक्ति की जरूरत है जो सत्यनिष्ठ हो, सिद्धांतों वाला हो और जिसे पैसों से खरीदा न जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री के पद पर वे राजोनारिसन से पूर्ण ईमानदारी की अपेक्षा करते हैं।

यह महत्वपूर्ण नियुक्ति तब हुई है जब रैंड्रियानिरिना ने पिछले सोमवार को तत्कालीन प्रधानमंत्री हेरिनत्सलामा राजोनारिवेलो और अन्य सभी कैबिनेट मंत्रियों को बर्खास्त कर दिया था। उस समय इस अचानक उठाए गए कदम का कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया था। राजोनारिवेलो, जो निजी क्षेत्र से आए थे, उन्हें अक्टूबर में रैंड्रियानिरिना के सत्ता संभालने के तुरंत बाद नियुक्त किया गया था। ज्ञात हो कि पूर्व राष्ट्रपति एंड्री राजोएलिना को भारी विरोध प्रदर्शनों के बाद देश छोड़कर भागना पड़ा था।

नए प्रधानमंत्री राजोनारिसन 2021 से वित्तीय खुफिया इकाई सामिफिन का नेतृत्व कर रहे हैं, जो अवैध वित्तीय प्रवाह, मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण के खिलाफ काम करती है। उम्मीद है कि वे जल्द ही अपनी नई कैबिनेट की घोषणा करेंगे। यह राजनीतिक बदलाव ऐसे समय में हो रहा है जब हिंद महासागर का यह द्वीप राष्ट्र गंभीर संकट से गुजर रहा है। पिछले सितंबर में पानी और बिजली की कमी के खिलाफ शुरू हुए प्रदर्शनों ने एक बड़े आंदोलन का रूप ले लिया था, जिसे दबाने की सरकारी कोशिशों में कई लोग हताहत हुए थे।