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व्यवसायी विक्रम वधवा को गिरफ्तार हुआ

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक धोखाधड़ी मामले में बड़ी सफलता

राष्ट्रीय खबर

चंडीगढ़: चंडीगढ़ पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा को शहर के सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में से एक को सुलझाने में बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से जुड़ी करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी के मामले में प्रमुख व्यवसायी विक्रम वधवा को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई चंडीगढ़ नगर निगम और क्रेस्ट द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों के आधार पर की गई है।

यह मामला सरकारी और अर्ध-सरकारी संस्थानों के धन के दुरुपयोग से जुड़ा है। पुलिस जांच के अनुसार, यह धोखाधड़ी 200 करोड़ रुपये से अधिक की है। मुख्य शिकायतें चंडीगढ़ नगर निगम और क्रेस्ट की ओर से दर्ज की गई थीं, जिनके बैंक खातों से अवैध रूप से धन का हेरफेर किया गया था। ईओडब्ल्यू के अधिकारियों ने इसे इस साल की सबसे महत्वपूर्ण गिरफ्तारी बताया है, क्योंकि विक्रम वधवा इस पूरे रैकेट की एक अहम कड़ी माना जा रहा है।

गिरफ्तारी के बाद, आरोपी को स्थानीय अदालत में पेश किया गया। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सात दिनों की रिमांड की मांग की थी, लेकिन अदालत ने आरोपी को पांच दिनों की पुलिस रिमांड पर भेजने का आदेश दिया। पुलिस का मानना है कि रिमांड के दौरान पूछताछ से घोटाले से जुड़े महत्वपूर्ण बैंक रिकॉर्ड और जाली दस्तावेजों को बरामद किया जा सकेगा।

आरोपी से उन संपत्तियों और बैंक खातों के बारे में भी पूछताछ की जाएगी जहाँ इस धोखाधड़ी के पैसे को डायवर्ट या निवेश किया गया है। जांच दल इस बात की भी जांच कर रहा है कि क्या बैंक के भीतर से भी किसी कर्मचारी ने इस घोटाले में वधवा की मदद की थी।

चंडीगढ़ नगर निगम और क्रेस्ट जैसे संस्थानों के साथ हुई इस धोखाधड़ी ने सरकारी धन की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। नगर निगम की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि वे पुलिस के साथ पूरी तरह सहयोग कर रहे हैं ताकि जनता का पैसा वापस मिल सके। विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरफ्तारी से बैंक धोखाधड़ी के कई अन्य जुड़े हुए मामले भी खुल सकते हैं। यह गिरफ्तारी शहर के व्यापारिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है, क्योंकि विक्रम वधवा एक जाना-माना चेहरा रहा है। ईओडब्ल्यू अब इस घोटाले की जड़ों तक पहुँचने के लिए फोरेंसिक ऑडिट और डिजिटल साक्ष्यों का सहारा ले रही है।