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सावधान! सरगुजा में ‘बारूद’ के ढेर पर बैठे लोग? फायर सेफ्टी जांच ठप, प्राइवेट कंपनी बांट रही NOC; गर्मी में बढ़ा बड़ी आगजनी का खतरा

सरगुजा: गर्मी का मौसम शुरू होते ही आग लगने की घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में हर साल जिला प्रशासन, नगर निगम, फायर सेफ्टी और बिजली विभाग की संयुक्त टीम शहर के व्यावसायिक भवनों की जांच करती थी ताकि आगजनी की घटनाओं को रोका जा सके. लेकिन इस साल मार्च का आधा महीना गुजर जाने के बाद भी ऐसी कोई जांच शुरू नहीं हो पाई है. बीते महीने शहर में एक बड़ी आगजनी की घटना हुई थी, जिसमें करीब सात दुकानें जलकर खाक हो गई थीं. इसके बावजूद अब तक प्रशासन की ओर से कोई सघन जांच अभियान शुरू नहीं किया गया है.

फायर सेफ्टी विभाग भी लाचार

फायर एंड सेफ्टी विभाग भी इस मामले में काफी हद तक लाचार नजर आ रहा है. दरअसल, सरकार ने अब फायर सेफ्टी की जांच और अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी करने का काम एक निजी एजेंसी को सौंप दिया है. फायर सेफ्टी अधिकारी गुलशन तिवारी के अनुसार पहले यह जांच विभाग खुद करता था और होमगार्ड कार्यालय से भवन मालिकों को एनओसी दी जाती थी. लेकिन अब यह काम निजी कंपनियां कर रही हैं. हालांकि विभाग अपनी नियमित जांच करता रहता है, लेकिन एनओसी जारी करने का अधिकार नहीं होने से भवन मालिकों पर विभाग का नियंत्रण कमजोर हो गया है.

लोगों ने भी उठाए सवाल

शहर निवासी शुभान्कुर पाण्डेय का कहना है कि शहर में लोग भवन बनाने में करोड़ों रुपये खर्च करते हैं, लेकिन फायर सेफ्टी के इंतजाम पर ध्यान नहीं देते. उनका आरोप है कि कई बार नगर निगम बिना सही जांच के ही एनओसी जारी कर देता है.

शहर में लगातार मॉल, अस्पताल और अन्य व्यावसायिक भवन बन रहे हैं, लेकिन उनमें फायर सेफ्टी के जरूरी उपकरण नहीं हैं. घटना होने के बाद फायर ब्रिगेड पहुंचने तक काफी नुकसान हो जाता है. इसलिए गर्मी से पहले सभी संस्थानों का निरीक्षण होना जरूरी है.– सामाजिक कार्यकर्ता ए.एन. पांडे

नगर निगम ने लिया संज्ञान

अंबिकापुर नगर निगम के लोक निर्माण विभाग के सभापति मनीष सिंह ने कहा कि इस मुद्दे की जानकारी मिलने के बाद अधिकारियों से चर्चा की जाएगी. यदि पहले की तरह संयुक्त टीम बनाकर जांच की प्रक्रिया है, तो गर्मी को देखते हुए जल्द ही टीम बनाकर निरीक्षण कराया जाएगा.

पहले भी मिली थीं कई कमियां

पिछले साल अप्रैल 2025 तक दमकल विभाग ने जिले में 360 संस्थानों का निरीक्षण किया था और उनमें मिली कमियों को दूर करने के लिए नोटिस भी जारी किया गया था. आगजनी से बचाव के उपायों को लेकर सबसे ज्यादा कमियां सरकारी और निजी अस्पतालों में पाई गई थीं. वर्ष 2023-24 में दमकल विभाग ने 48 अस्पतालों का निरीक्षण किया था, जिसमें निजी अस्पतालों के साथ पीएचसी, सीएचसी और मेडिकल कॉलेज अस्पताल भी शामिल थे.

इन संस्थानों में भी मिली थी कमी

निरीक्षण के दौरान मैरिज हॉल, होटल, गोदाम, राइस मिल, कोल्ड स्टोरेज, सिनेमा हॉल, लघु उद्योग और कई सरकारी कार्यालयों में भी फायर सेफ्टी उपकरणों की कमी पाई गई थी. कई दुकानों और गोदामों में बड़ी मात्रा में ज्वलनशील सामान रखा गया है, जिससे खतरा और बढ़ जाता है.

ये सुरक्षा उपाय जरूरी

आगजनी से बचाव के लिए किसी भी संस्थान में हर 15 मीटर की दूरी पर फायर एक्सटिंग्विशर होना जरूरी है. इसके अलावा बड़े भवनों में स्मोक डिटेक्टर, स्प्रिंकलर, होज रील, फायर अलार्म सिस्टम, फायर एग्जिट, अंडरग्राउंड वाटर टैंक और पंप जैसी व्यवस्थाएं अनिवार्य हैं. साथ ही चार पहिया वाहनों में भी एक फायर एक्सटिंग्विशर रखना जरूरी माना जाता है.