ईरान ने साइबर युद्ध के मोर्चे पर अमेरिका का पछाड़ा
वाशिंगटनः ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य संघर्ष के बीच अब डिजिटल मोर्चे पर भी तनाव चरम पर पहुँच गया है। एक ईरानी हैकर समूह ने अमेरिका की प्रतिष्ठित मेडिकल टेक्नोलॉजी कंपनी स्ट्राइकर पर साइबर हमले की जिम्मेदारी ली है। युद्ध की शुरुआत के बाद से किसी अमेरिकी कंपनी पर ईरान द्वारा किया गया यह पहला बड़ा और प्रभावशाली साइबर हमला माना जा रहा है। मिशिगन में मुख्यालय वाली स्ट्राइकर कंपनी दुनिया भर में चिकित्सा उपकरण और उन्नत स्वास्थ्य तकनीक बनाने के लिए जानी जाती है। इस हमले ने न केवल कंपनी के परिचालन को प्रभावित किया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साइबर सुरक्षा की चिंताओं को भी बढ़ा दिया है।
ऐतिहासिक रूप से, ईरान को दुनिया के कुछ सबसे कुख्यात वाइपर साइबर हमलों के लिए जिम्मेदार माना जाता है। वाइपर हमले वे होते हैं जिनका उद्देश्य केवल डेटा चोरी करना नहीं, बल्कि कंप्यूटर नेटवर्क और डिवाइस से सारा डेटा पूरी तरह मिटा देना होता है। इससे पहले 2012 में सऊदी अरब की राष्ट्रीय तेल कंपनी सऊदी अरामको और 2014 में सैंड्स कैसीनो पर हुए हमले इसके प्रमुख उदाहरण रहे हैं। वर्तमान युद्ध शुरू होने के बाद से, कई ईरानी समर्थक हैकर समूहों ने छोटे-मोटे हमलों के दावे किए थे, लेकिन वे अधिकतर वेबसाइटों के स्वरूप बदलने (Defacement) तक ही सीमित थे। गूगल और प्रूफपॉइंट जैसी सुरक्षा कंपनियों ने अब तक केवल जासूसी से जुड़ी गतिविधियों की ही पुष्टि की थी, लेकिन स्ट्राइकर पर हुआ यह हमला एक अलग स्तर की आक्रामकता को दर्शाता है।
बुधवार को हुए इस हमले ने कंपनी के कामकाज को पूरी तरह ठप कर दिया। स्ट्राइकर के एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कंपनी द्वारा जारी किए गए कर्मचारियों के फोन ने अचानक काम करना बंद कर दिया, जिससे सहकर्मियों के बीच संचार और दैनिक कार्य पूरी तरह रुक गए। हंडाला टीम नामक समूह ने इस हमले की जिम्मेदारी अपने टेलीग्राम और एक्स अकाउंट पर ली है। साइबर विशेषज्ञों और खुफिया एजेंसियों का मानना है कि इस समूह के संबंध सीधे तौर पर ईरान के खुफिया मंत्रालय से हैं। यह समूह अक्सर सोशल मीडिया पर अपनी गतिविधियों का बखान करता रहता है, जिसके कारण हाल के दिनों में इनके कई अकाउंट्स को प्लेटफॉर्म्स से हटाया भी गया है।
हालांकि, हमले के सटीक तकनीकी पहलुओं की जांच अभी जारी है, लेकिन प्रारंभिक साक्ष्यों से पता चलता है कि हैकर्स ने कंपनी के माइक्रोसॉफ्ट इनट्यून अकाउंट तक पहुंच हासिल कर ली थी। माइक्रोसॉफ्ट इनट्यून एक ऐसा समाधान है जिसका उपयोग कंपनियां अपने कर्मचारियों के मोबाइल और कंप्यूटर उपकरणों को दूरस्थ रूप से प्रबंधित करने के लिए करती हैं। साइबर सुरक्षा कंपनी सोफोस के थ्रेट इंटेलिजेंस निदेशक रेफ पिलिंग के अनुसार, हैकर्स ने प्रबंधन कंसोल का उपयोग करके कर्मचारियों के डिवाइस को फैक्ट्री सेटिंग्स पर वापस भेज दिया, जिससे उनका सारा डेटा और कार्यक्षमता समाप्त हो गई। यह हमला दर्शाता है कि अब साइबर युद्ध केवल जासूसी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सीधे तौर पर औद्योगिक और नागरिक ढांचे को नुकसान पहुँचाने की ओर बढ़ रहा है।