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मंगल की प्राचीन परतों में छिपा खगोलीय रहस्य: एक नई खोज

अब तक अज्ञात रहे नये खनिज की खोज हुई

  • खोज का आधार और स्थान

  • इसकी आणविक संरचना भिन्न है

  • पानी और जीवन के संकेत मिलते हैं

राष्ट्रीय खबर

रांचीः वैज्ञानिकों ने मंगल ग्रह के भूगर्भीय इतिहास को समझने की दिशा में एक क्रांतिकारी सफलता हासिल की है। हालिया डेटा विश्लेषण और मंगल पर मौजूद रोवर्स द्वारा भेजे गए नमूनों के अध्ययन से एक बिल्कुल नए और अज्ञात खनिज की पहचान की गई है। यह खनिज मंगल के उन क्षेत्रों में पाया गया है जहाँ अरबों साल पहले पानी की धाराएं बहती थीं।

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यह खोज मुख्य रूप से मंगल के सल्फेट-युक्त जमाव वाले क्षेत्रों में हुई है। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह खनिज मैग्नीशियम सल्फेट के एक दुर्लभ रूप जैसा दिखता है, लेकिन इसकी आणविक संरचना पृथ्वी पर पाए जाने वाले किसी भी प्राकृतिक खनिज से भिन्न है। वैज्ञानिकों का मानना है कि मंगल के अत्यधिक कम वायुमंडलीय दबाव और विशिष्ट तापमान स्थितियों ने इस खनिज को जन्म दिया है।

इस खनिज की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसके निर्माण के लिए तरल पानी की उपस्थिति अनिवार्य है। यह खोज इस सिद्धांत को और मजबूती देती है कि मंगल कभी एक नीला ग्रह था जहाँ नदियाँ और झीलें मौजूद थीं। खनिज के भीतर फंसी सूक्ष्म नमी या हाइड्रेटेड संरचनाएं यह संकेत देती हैं कि मंगल की सतह के नीचे अभी भी पानी के अंश सुरक्षित हो सकते हैं।

भू-गर्भ वैज्ञानिकों के लिए यह खोज किसी खजाने से कम नहीं है। यह खनिज एक टाइम कैप्सूल की तरह कार्य करता है, जो मंगल के वायुमंडल के क्रमिक विनाश और वहां के समुद्रों के सूखने की कहानी बयां करता है। इस खनिज की क्रिस्टलीय संरचना का अध्ययन करके यह पता लगाया जा सकता है कि मंगल का वातावरण कब और कैसे जीवन के अनुकूल से प्रतिकूल हो गया।

यह खोज नासा और इसरो जैसे अंतरिक्ष संगठनों के भविष्य के सैंपल रिटर्न मिशन के लिए लैंडिंग साइट चुनने में मदद करेगी। यदि इस खनिज के पास जैविक अणु पाए जाते हैं, तो यह इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण होगा कि मंगल पर कभी सूक्ष्मजीव मौजूद थे।

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