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अब झानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग की तैयारी

एक सौ हस्ताक्षरों की जरूरत थी तो 180 ने हस्ताक्षर किये

  • प्रस्ताव के लिए विपक्ष ने जुटाया समर्थन

  • इंडिया गठबंधन का सम्मिलित प्रयास है

  • टीएमसी के साथ सीधी टक्कर जैसी स्थिति

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध संसद के दोनों सदनों—लोकसभा और राज्यसभा—में महाभियोग प्रस्ताव लाने की दिशा में विपक्षी गठबंधन इंडिया ने एक बड़ी बढ़त हासिल कर ली है। तृणमूल कांग्रेस द्वारा शुरू किए गए इस प्रस्ताव को अब कांग्रेस सहित गठबंधन के अन्य सहयोगियों का भी मजबूत साथ मिल गया है। इस कदम को केंद्र सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाने की विपक्ष की एक सोची-समझी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने के लिए आवश्यक न्यूनतम हस्ताक्षरों का आंकड़ा विपक्ष ने पार कर लिया है। सूत्रों के अनुसार, लोकसभा में इस प्रस्ताव को पेश करने के लिए कम से कम 100 सांसदों के हस्ताक्षरों की आवश्यकता होती है, लेकिन विपक्ष ने अब तक 180 से अधिक सांसदों का समर्थन हासिल कर लिया है। इसी प्रकार, राज्यसभा में जहां 50 सांसदों के हस्ताक्षरों की जरूरत होती है, वहां 60 से अधिक सांसद पहले ही इस प्रस्ताव पर अपने हस्ताक्षर कर चुके हैं। हालांकि, दोनों सदनों के लिए तैयार किए गए मसौदे की भाषा अलग-अलग हो सकती है।

इस पूरी मुहिम का नेतृत्व तृणमूल कांग्रेस कर रही है। लोकसभा में सांसदों के हस्ताक्षर जुटाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी टीएमसी की उप-दलनेता शताब्दी राय को सौंपी गई है। वे बजट सत्र के पहले भाग से ही सक्रिय रूप से समर्थन जुटाने में लगी हुई थीं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि यद्यपि उन्होंने इंडिया गठबंधन से बाहर के दलों से औपचारिक रूप से मदद नहीं मांगी थी, फिर भी उनके प्रयासों के चलते कुछ निर्दलीय सांसदों ने भी इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं। दूसरी ओर, राज्यसभा में टीएमसी के मुख्य सचेतक नदीमुल हक विपक्षी सांसदों को एकजुट करने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

हस्ताक्षर अभियान पूरा होने के बाद, विपक्ष अब इस प्रस्ताव को औपचारिक रूप से दोनों सदनों के पटल पर रखेगा। इसके बाद, लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) और राज्यसभा के सभापति यह तय करेंगे कि इस प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी जाए या नहीं। यदि अनुमति मिलती है, तो सदन में इस पर विस्तृत बहस होगी और अंत में मतदान कराया जाएगा। ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध महाभियोग की यह प्रक्रिया लंबी और संवैधानिक रूप से जटिल है, जिसमें सफल होने के लिए भारी बहुमत की आवश्यकता होती है। फिलहाल, आवश्यक हस्ताक्षर जुटाकर विपक्षी खेमे ने इस लंबी लड़ाई के पहले चरण को सफलतापूर्वक पार कर लिया है।