Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
पुडुचेरी में पीएम मोदी का 'शक्ति प्रदर्शन'! फूलों की बारिश और 'भारत माता की जय' के नारों से गूंजा शह... नारी शक्ति वंदन बिल में इतनी 'जल्दबाजी' क्यों? चुनावी मास्टरस्ट्रोक या कोई बड़ा बदलाव; पर्दे के पीछे... क्या BJP में शामिल होने वाले हैं राघव चड्ढा? आतिशी की 'रहस्यमयी मुस्कान' ने बढ़ा दी सियासी हलचल! छोटी बहन का खौफनाक 'डेथ प्लान'! प्रेमी के साथ मिलकर बड़ी बहन के आशिक को उतारा मौत के घाट; चाकू से गो... Meerut Crime: फौजी पति की हत्या के पीछे निकली अपनी ही पत्नी, प्रेमी के साथ मिलकर रचा था मौत का तांडव Noida Weather Update: नोएडा में बदला मौसम का मिजाज, आंधी-बारिश ने दी दस्तक; किसानों के चेहरे पर छाई ... AAP में खलबली! राघव चड्ढा के समर्थन में उतरे भगवंत मान; बोले— "जेल और जांच से नहीं डरते केजरीवाल के ... नोएडा की सड़कों पर 'मौत' का पहरा! आवारा कुत्तों ने पूर्व अधिकारी को बुरी तरह नोंचा; लहूलुहान हालत मे... बंगाल चुनाव में 'सुरक्षा' पर संग्राम! TMC से जुड़े लोगों के साथ 2100 पुलिसकर्मी तैनात; चुनाव आयोग ने... नाई की दुकान में 'मौत का प्लान'! रेलवे सिग्नल बॉक्स उड़ाने की थी साजिश; UP ATS ने ऐसे दबोचे 4 संदिग्...

सीमेंट निविदा में कंपनियों की आपसी मिलीभगत

ओएनजीसी की शिकायत के बाद व्यापारी गठजोड़ का खुलासा

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः जब भारत के सबसे बड़े तेल खोजकर्ता, ओएनजीसी ने 2018 में सीमेंट ऑर्डर के लिए निविदा खोली, तो उसे कुछ संदिग्ध लगा। सभी प्रतिस्पर्धी बोलियां ठीक 7,000 रुपये प्रति मीट्रिक टन थीं। जब इंडिया सीमेंट्स के एक कार्यकारी से इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजा अपनाते हुए कहा कि सात उनका लकी नंबर है।

समीक्षा की गई भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग की एक गोपनीय रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी ओएनजीसी को निशाना बनाकर पिछले एक दशक से अधिक समय से कीमतों में मिलीभगत चल रही थी। पांच साल की लंबी जांच के बाद पता चला कि डालमिया सीमेंट (भारत) और श्री दिग्विजय सीमेंट के बीच 2007 से 2018 तक 12 वर्षों का कार्टेल काल रहा। इंडिया सीमेंट्स भी 2017-18 में इस गुटबंदी का हिस्सा बनी।

रिपोर्ट में भारतीय कंपनियों द्वारा मिलीभगत के स्पष्ट प्रयासों की पहचान की गई है। सीसीआई ने श्री दिग्विजय के पूर्व एमडी राजीव नांबियार, डालमिया भारत के अरबपति चेयरमैन वाई.एच. डालमिया और इंडिया सीमेंट्स के एन. श्रीनिवासन सहित आठ शीर्ष अधिकारियों को इन उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार ठहराया है। श्री दिग्विजय के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रेम आर. सिंह की गवाही के अनुसार, समान मूल्य उद्धृत करने का मुख्य उद्देश्य कंपनियों के बीच राजस्व और वॉल्यूम का बराबर बंटवारा करना था।

जांच में यह भी सामने आया कि इन कंपनियों ने निविदा भरने वाली विदेशी कंपनियों, जैसे टेक्सास स्थित श्लम्बरगर और यूएई की क्लासिक ऑयल फील्ड केमिकल्स को भी निशाना बनाया। उन्होंने सरकार से विदेशी बोलीदाताओं के पास आवश्यक प्रमाणन न होने की शिकायतें कीं और स्वदेशी को बढ़ावा देने का तर्क दिया।

जांचकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला कि इन कंपनियों ने कम से कम एक बार सीमेंट की आपूर्ति को प्रतिबंधित करने का निर्णय लेकर ओएनजीसी पर विदेशी बोलियों को रद्द करने का दबाव बनाने की कोशिश की, जो अविश्वास कानूनों का उल्लंघन है। एक कार्यकारी ने दूसरे को लिखा था कि वे इस बात को हजम नहीं कर पा रहे थे कि कोई विदेशी बोलीदाता निविदा जीत जाए।