Breaking News in Hindi

इस साल के 31 मार्च तक नक्सलवाद साफः अमित शाह

सीआरपीएफ से 87वें स्थापना दिवस परेड में शामिल हुए

  • सीआरपीएफ का शौर्य और बलिदान

  • कांग्रेस के खिलाफ राजनीतिक बयानबाजी

  • भूपेन बोरा का हृदय परिवर्तन हुआ देखकर

उत्तर पूर्व संवाददाता

गुवाहाटी: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पूर्वोत्तर भारत की अपनी महत्वपूर्ण यात्रा के दौरान देश की आंतरिक सुरक्षा को लेकर कई बड़े संकल्प साझा किए। असम में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के 87वें स्थापना दिवस परेड को संबोधित करते हुए गृह मंत्री ने घोषणा की कि भारत सरकार ने आगामी 31 मार्च तक देश से नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने का दृढ़ निश्चय किया है। उन्होंने विशेष रूप से कोबरा बटालियन और सीआरपीएफ के जवानों की सराहना करते हुए कहा कि वामपंथी उग्रवाद और माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में शांति बहाली के लिए इन बलों का योगदान अतुलनीय रहा है।

स्थापना दिवस के अवसर पर गृह मंत्री ने शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने बताया कि राष्ट्र की सेवा में अब तक सीआरपीएफ के 2,270 जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दी है, जिनमें से अकेले 700 जवान पूर्वोत्तर क्षेत्र से थे। शाह ने कहा कि चाहे जम्मू-कश्मीर हो या हिंसाग्रस्त मणिपुर, सीआरपीएफ की बटालियनों ने आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस दौरान असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की उपस्थिति में शाह ने औपचारिक परेड का निरीक्षण किया और जवानों को वीरता पदक से सम्मानित किया।

अपने संबोधन के दूसरे चरण में अमित शाह ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासनकाल में देश की सीमाएं असुरक्षित और खुली छोड़ दी गई थीं, जिसके कारण असम और अन्य सीमावर्ती क्षेत्रों में घुसपैठ की समस्या गंभीर हो गई। शाह ने कहा कि भाजपा सरकार ने घुसपैठ की इस समस्या से सख्ती से निपटा है।

विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए गृह मंत्री ने कछार जिले से ₹6,900 करोड़ की लागत वाले ‘वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम’ के दूसरे चरण की शुरुआत की। उन्होंने दावा किया कि आज असम में प्रतिदिन 14 किलोमीटर सड़क का निर्माण हो रहा है, जो देश में सर्वाधिक है। साथ ही, उन्होंने वादा किया कि अगले 5 वर्षों के भीतर असम को पूरी तरह से बाढ़मुक्त बनाने के लिए प्रभावी योजनाएं लागू की जाएंगी।

यात्रा का एक दिलचस्प राजनीतिक पहलू तब सामने आया जब असम के वरिष्ठ नेता भूपेन बोरा ने भाजपा में शामिल होने से पहले अमित शाह से मुलाकात की। बैठक के बाद बोरा ने स्वीकार किया कि गृह मंत्री के बारे में उनकी पिछली धारणाएं गलत थीं। उन्होंने मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा का आभार व्यक्त किया जिन्होंने इस मुलाकात को संभव बनाया। बोरा ने अमित शाह के व्यक्तित्व और उनकी कार्यशैली की प्रशंसा करते हुए इसे अपने जीवन का एक यादगार अनुभव बताया।