Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
LPG Crisis in India: शिरडी से जम्मू तक गैस की भारी किल्लत, सप्लाई चेन ठप होने से बढ़ी मुसीबत; जानें ... दिल्ली में जनजातीय कला का जलवा! 12 दिनों में बिकीं ₹1.25 करोड़ की कलाकृतियाँ; ट्राइब्स आर्ट फेस्ट का... PM Modi Kolkata Rally: बंगाल में अब 'महाजंगलराज' नहीं चलेगा—PM मोदी; ब्रिगेड ग्राउंड से ममता सरकार क... Nitish Kumar Security Breach: बेगूसराय में सीएम नीतीश की सुरक्षा में चूक, हेलीपैड कैंपस में घुसा सां... मुख्यमंत्री सेहत योजना ने बचाई जान! मोहाली की महिला का हुआ फ्री हार्ट ऑपरेशन; ₹4 लाख का खर्च सरकार न... Israel-Lebanon War: लेबनान पर हमले की तैयारी में इजराइल, हिजबुल्लाह के ठिकानों को खत्म करने का पूरा ... PM Modi in Silchar: असम से पीएम मोदी का कांग्रेस पर बड़ा हमला, कहा- पूर्वोत्तर के साथ हुआ सौतेला व्यव... अरब देशों में 'जंग' का साया! सुरक्षित भविष्य के लिए लाखों भारतीयों ने छोड़ीं नौकरियां; सूनी होने लगीं... सोनम वांगचुक आज़ाद! 6 महीने बाद हटा NSA, केंद्र सरकार ने अचानक क्यों बदला अपना फैसला? जानें हिरासत रद... Kolkata Violence: पीएम मोदी की रैली से पहले भारी बवाल, मंत्री शशि पांजा के आवास पर हमला; TMC-BJP कार...

एक छोटे व्यापारी का विद्रोह टैरिफ रोक गया

बड़े कॉरपोरेट तो थर थर कांप रहे थे अमेरिकी राष्ट्रपति से

  • वाइन बनाने का बहुत छोटा कारोबार है

  • विक्टर श्वार्ट्स अब देश के हीरो बने

  • कानूनी लड़ाई की शुरुआत कर दी

वाशिंगटनः जहाँ एक ओर अमेरिका के बड़े कॉरपोरेट घराने और दिग्गज कंपनियों के सीईओ डोनाल्ड ट्रंप की आर्थिक नीतियों के खिलाफ बोलने से बचते रहे, वहीं न्यूयॉर्क के एक छोटे से वाइन आयातक ने अपने अस्तित्व को दांव पर लगाकर इस चुनौती को स्वीकार किया। विक्टर श्वार्ट्ज, जो वीओएस सिलेक्शंस नामक वाइन आयात कंपनी के मालिक हैं, उस कानूनी लड़ाई का मुख्य चेहरा बने जिसने अंततः अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में राष्ट्रपति ट्रंप के व्यापक टैरिफ को अवैध घोषित करवा दिया।

पिछले साल जब राष्ट्रपति ट्रंप ने 1930 के बाद से अब तक के सबसे ऊंचे टैरिफ लागू करने की योजना की घोषणा की, तो अधिकांश बड़े व्यापारिक घरानों ने चुप्पी साध ली। उन्हें डर था कि राष्ट्रपति की प्रमुख आर्थिक नीति का विरोध करना उनके अरबों डॉलर के राजस्व के लिए और भी महंगा साबित हो सकता है। लेकिन श्वार्ट्ज के लिए यह केवल व्यवसाय का मामला नहीं था, बल्कि उनके परिवार द्वारा चलाए जा रहे दशकों पुराने व्यापार के लिए अस्तित्व का संकट था।

विक्टर श्वार्ट्ज को शुरुआत में इस लड़ाई का मुख्य चेहरा बनने में संकोच था। उन्होंने एक साक्षात्कार में स्वीकार किया कि मुख्य वादी बनना एक बड़ी जिम्मेदारी थी जिसने उन्हें सोचने पर मजबूर कर दिया। हालांकि, लिबर्टी जस्टिस सेंटर के साथ जुड़ने के बाद, उन्होंने महसूस किया कि वह अंतिम रक्षा पंक्ति के रूप में खड़े हैं। 14 अप्रैल, 2025 को दायर किए गए वीओएस सिलेक्शंस वना ट्रंप मामले ने राष्ट्रपति द्वारा इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट के उस अभूतपूर्व उपयोग को चुनौती दी, जिसके तहत उन्होंने एकतरफा रूप से टैरिफ लगाए थे।

शुक्रवार, 20 फरवरी 2026 को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए श्वार्ट्ज और अन्य छोटे व्यवसायों के पक्ष में निर्णय दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति को इस कानून के तहत एकतरफा टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है। चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने अपने फैसले में कहा कि संविधान ने कर लगाने और व्यापार को विनियमित करने की शक्ति संसद (कांग्रेस) को दी है, न कि कार्यपालिका को।

यह जीत न केवल विक्टर श्वार्ट्ज की है, बल्कि उन हजारों छोटे व्यापारियों की भी है जिन्होंने इस आर्थिक तानाशाही के खिलाफ आवाज उठाने का साहस दिखाया। हालांकि इस लड़ाई ने श्वार्ट्ज पर व्यक्तिगत और आर्थिक बोझ डाला, लेकिन उनकी दृढ़ता ने अमेरिकी कानून की सर्वोच्चता को पुनः स्थापित कर दिया।