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Anant Bhaskar Murder Case: आंध्र प्रदेश के पूर्व MLC अनंत भास्कर पर हत्या का मामला: सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस की जांच पर उठाए गंभीर सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने वाईएसआरसीपी एमएलसी अनंत उदय भास्कर के खिलाफ 2022 के हत्या मामले की जांच पर कड़ी फटकार लगाई और कहा यह पुलिस और सत्ता के गठजोड़ का स्पष्ट मामला है. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि यह पुलिस और सत्ता के गठजोड़ का स्पष्ट मामला है. पुलिस और जांच एजेंसियां ​​आरोपियों के साथ मिलीभगत कर रही हैं और अपीलकर्ता को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 167(2) के तहत आसानी से जमानत दिलाने के सभी प्रयास किए गए हैं. हालांकि हाईकोर्ट ने जमानत नहीं दी. इसलिए यह अपील दायर की गई है. वह पिछले दो वर्षों से अंतरिम जमानत का आनंद ले रहे हैं.

सीजेआई ने कहा कि वरिष्ठ अधिवक्ता लूथरा ने बताया कि एक पूरक आरोपपत्र दायर किया गया है, जो जघन्य अपराध की जांच में राज्य पुलिस की मिलीभगत को दर्शाता है, भले ही यह स्पष्ट न हो कि पुलिस आरोपियों के साथ मिलीभगत कर रही थी.

वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी को सौंपे जांच

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश देते हुए कहा कि हम आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध करते हैं कि वे सुनवाई किसी वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी को सौंपें.

कोर्ट ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से आग्रह किया कि वे इस मामले को एक सीनियर ज्यूडिशियल ऑफिसर को सौंप दें, जिन्हें हर हफ्ते इस मामले को देखना होगा.

हाई कोर्ट के पोर्टफोलियो जज को ट्रायल की प्रोग्रेस पर नजर रखने का निर्देश दिया गया है, ताकि टाइमलाइन का पालन पक्का हो सके. हाई कोर्ट को ट्रायल पर रोक लगाने के लिए कोई अंतरिम ऑर्डर पास न करने का निर्देश दिया गया है.

सुनवाई 30 नवंबर से पहले समाप्त हो

कोर्ट ने कहा कि आरोप तय करने का मुद्दा 18 अप्रैल, 2026 से पहले तय किया जाना चाहिए. आरोप तय होने के बाद, साक्ष्यों की जांच पूरी की जानी चाहिए. यदि कोई और जांच आवश्यक हो, तो वह 31 मार्च से पहले की जानी चाहिए. सुनवाई 30 नवंबर, 2026 से पहले समाप्त होनी चाहिए.

कोर्ट ने अपने निर्देश में कहा कि इन निर्देशों के अनुपालन के लिए सुनवाई की निगरानी की जानी चाहिए. निचली अदालत के न्यायाधीश को अन्य मामलों से मुक्त किया जाए, ताकि वर्तमान कार्यवाही को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जा सके. सुनवाई पर रोक लगाने का कोई आदेश पारित न किया जाए.