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अमेरिकी कांग्रेस में जारी तनातनी के बीच ही नया बयान

चुनाव सुधार और ट्रंप का ट्रुथ सोशल पर कड़ा प्रहार

वाशिंगटनः अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ट्रुथ सोशल पर की गई हालिया पोस्ट ने अमेरिका के संवैधानिक और राजनीतिक परिदृश्य में एक नया भूचाल ला दिया है। 2026 के मध्य-अवधि चुनावों से ठीक पहले ट्रंप का यह बयान कि वोटिंग केवल नागरिकों का अधिकार है, महज एक बयान नहीं बल्कि चुनावी प्रक्रियाओं को पूरी तरह बदलने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि वह एक नया कार्यकारी आदेश लाने की तैयारी में हैं, जो मतदान के लिए दो चीजों को अनिवार्य बना देगा मतदान के समय सरकारी फोटो पहचान पत्र दिखाना। मतदाता पंजीकरण के समय पासपोर्ट या जन्म प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज प्रस्तुत करना।

ट्रंप का तर्क है कि मौजूदा मेल-इन मतपत्र प्रणाली और अवैध प्रवासियों के डेटाबेस में कमियों के कारण चुनावी अखंडता खतरे में है। उन्होंने अपने संबोधन में 240 घंटों (10 दिन) के भीतर व्यवस्था में सुधार के संकेत दिए हैं, जिससे यह साफ है कि वह 2026 के चुनावों में किसी भी प्रकार की विदेशी घुसपैठ या फर्जी वोटिंग की गुंजाइश को खत्म करना चाहते हैं। ट्रंप की इस घोषणा ने वाशिंगटन में वैचारिक युद्ध छेड़ दिया है:

रिपब्लिकन खेमा के अधिकांश सदस्य इस कदम का समर्थन कर रहे हैं। उनका मानना है कि सेव अमेरिका एक्ट और मेगा एक्ट जैसे कानून चुनावी प्रक्रिया में जनता का विश्वास बहाल करेंगे। डेमोक्रेट्स ने इसे मतदाताओं का दमन करार दिया है। उनका तर्क है कि लाखों वैध अमेरिकी नागरिकों, विशेषकर अल्पसंख्यकों और कम आय वाले लोगों के पास तत्काल रूप से नागरिकता के दस्तावेजी प्रमाण उपलब्ध नहीं होते, जिससे वे मतदान से वंचित रह जाएंगे।

कई मानवाधिकार संगठनों और ब्रेनन सेंटर फॉर जस्टिस जैसे संस्थानों ने चेतावनी दी है कि इस तरह के कड़े नियम 21 मिलियन से अधिक अमेरिकियों को प्रभावित कर सकते हैं। यह विवाद अब जल्द ही अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर पहुंचने वाला है, क्योंकि राष्ट्रपति के पास चुनावी नियमों को राष्ट्रीय स्तर पर बदलने की कितनी कार्यकारी शक्ति है, यह एक गंभीर संवैधानिक प्रश्न है।

ट्रंप प्रशासन एक ऐसे सेंट्रलाइज्ड वोटर डेटाबेस की वकालत कर रहा है जो सीधे संघीय निगरानी में हो। आने वाले हफ्तों में विभिन्न राज्यों द्वारा इस कार्यकारी आदेश को अदालतों में चुनौती दी जाना तय है। चुनावी माहौल: इस मुद्दे ने मतदाताओं के बीच ध्रुवीकरण को चरम पर पहुंचा दिया है, जिससे 2026 के मध्य-अवधि चुनाव अमेरिकी इतिहास के सबसे विवादास्पद चुनावों में से एक बन सकते हैं।