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बिरियानी में लोगों की रूचि में भी कर चोरी का नया धंधा

सत्तर हजार करोड़ की टैक्स चोरी पकड़ी गयी

  • साफ्टवेयर में यह खेल हुआ था

  • आमदनी को हर रात छिपाते थे

  • देश भऱ में अब होगी इसकी जांच

राष्ट्रीय खबर

हैदराबाद: जिसे शुरुआत में हैदराबाद के कुछ प्रसिद्ध बिरयानी आउटलेट्स पर सामान्य छापेमारी माना जा रहा था, वह अब भारत के खाद्य एवं पेय उद्योग के सबसे बड़े टैक्स घोटालों में से एक बनकर उभरा है। आयकर विभाग की हैदराबाद इकाई ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बिग डेटा एनालिटिक्स का उपयोग करते हुए करीब 70,000 करोड़ रुपये की अघोषित आय और बिलिंग हेराफेरी का पता लगाया है।

जांच की शुरुआत हैदराबाद की मशहूर बिरयानी चेन (जैसे शाह गौस, पिस्ता हाउस और महफिल) पर छापेमारी से हुई थी। वहां जब्त किए गए डिजिटल दस्तावेजों और सर्वर की जांच के दौरान अधिकारियों को एक विशेष बिलिंग सॉफ्टवेयर के बारे में पता चला। आयकर विभाग ने उस सॉफ्टवेयर कंपनी के अहमदाबाद स्थित सेंटर से डेटा हासिल किया, जिसका उपयोग देश भर के 1 लाख से ज्यादा रेस्टोरेंट्स करते हैं। जांच में पाया गया कि इस सॉफ्टवेयर में डिलीट और एडिट का एक गुप्त फीचर था। रेस्टोरेंट मालिक दिन भर की नकद बिक्री का डेटा रात में सिस्टम से हटा देते थे, जिससे वह सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं होता था।

2019-20 से अब तक लगभग 70,000 करोड़ रुपये की बिक्री को छिपाया गया है। इस घोटाले के तार तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के अलावा कर्नाटक, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और गुजरात से भी जुड़े हैं। कर्नाटक में करीब 2,000 करोड़, तेलंगाना में 1,500 करोड़ और तमिलनाडु में 1,200 करोड़ की बिलिंग डिलीट करने के सबूत मिले हैं। विभाग का अनुमान है कि औसतन रेस्टोरेंट्स अपनी कुल बिक्री का लगभग 27 फीसद हिस्सा टैक्स चोरी के उद्देश्य से छिपा रहे थे।

आयकर विभाग ने पहली बार इतनी बड़ी मात्रा में डेटा (करीब 1.77 लाख रेस्टोरेंट आईडी) को खंगालने के लिए जेनेरेटिव  आ आई और उन्नत डेटा माइनिंग टूल्स का सहारा लिया। इन टूल्स की मदद से अधिकारियों ने रेस्टोरेंट्स के जीएसटी नंबरों को उनके सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर मौजूद डेटा से मैच किया, जिससे घोषित और वास्तविक आय के बीच का अंतर साफ हो गया।

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने अब इस जांच का दायरा पूरे देश में फैला दिया है। अधिकारियों का मानना है कि यह केवल एक सॉफ्टवेयर कंपनी का मामला है; ऐसी कई और कंपनियां हो सकती हैं जो रेस्टोरेंट्स को टैक्स चोरी में मदद कर रही हैं। आने वाले दिनों में कई बड़े रेस्टोरेंट समूहों पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की संभावना है।