Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Jharkhand Voting: सुविधा लेने में नंबर-1, वोटिंग में फिसड्डी; रांची समेत इन 4 शहरों का बुरा हाल Palamu News: पलामू में गोलगप्पा खाने से 150 से ज्यादा बच्चे बीमार, फूड पॉइजनिंग से मचा हड़कंप Delhi Assembly: 'फांसी घर' मामले में अरविंद केजरीवाल को अल्टिमेटम, विशेषाधिकार समिति के सामने होना ह... Delhi News: यमुना पार का होगा कायाकल्प, पूर्वी दिल्ली को ₹1075 करोड़ की परियोजनाओं की सौगात Jammu News: आरएस पुरा बाल सुधार केंद्र से 3 नाबालिग फरार, 2 पाकिस्तान के रहने वाले Drug Free Punjab: नशे के खिलाफ अभियान का दूसरा चरण, मोगा में केजरीवाल-मान ने फूंका बिगुल PM Modi AI Video: पीएम मोदी और स्पीकर के AI वीडियो पर एक्शन, कांग्रेस के 9 नेताओं को नोटिस Balod News: कब्र से दफन बच्ची का सिर गायब, तंत्र-मंत्र की आशंका, मिले नींबू और मांस पूर्णिया न्यूज़: ATM चोर से बना हॉस्पिटल संचालक, चोरी की आदत नहीं गई, पुलिस ने किया अरेस्ट X Down: एलन मस्क का सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' अचानक हुआ ठप, यूजर्स परेशान

हाइब्रिड सेल्स अब व्यापारिक उत्पादन की ओर

सौर ऊर्जा में नई क्रांति से दुनिया को होगा फायदा

  • क्या है यह हाइब्रिड तकनीक?

  • 34 फीसद दक्षता पायी गयी है

  • हमारे जीवन पर क्या होगा असर?

राष्ट्रीय खबर

रांचीः दुनिया जब स्वच्छ ऊर्जा की ओर तेजी से कदम बढ़ा रही है, तब हाइब्रिड सोलर सेल्स का व्यावसायिक उत्पादन शुरू होना ऊर्जा क्षेत्र की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक माना जा रहा है। दशकों से हम सौर ऊर्जा के लिए केवल सिलिकॉन-आधारित सोलर पैनलों पर निर्भर थे, लेकिन उनकी एक सीमा थी—वे सूर्य की रोशनी के केवल एक हिस्से को ही बिजली में बदल पाते थे। अब पेरोव्स्काइट नामक एक नए पदार्थ और पारंपरिक सिलिकॉन के मेल ने इस सीमा को तोड़ दिया है।

देखें इससे संबंधित वीडियो

पेरोव्स्काइट एक विशेष क्रिस्टल संरचना वाला पदार्थ है जो प्रकाश को सोखने में बेहद सक्षम होता है। टैंडम या हाइब्रिड सेल तकनीक में, सिलिकॉन की एक परत के ऊपर पेरोव्स्काइट की एक पतली परत लगाई जाती है। सिलिकॉन मुख्य रूप से लाल और इंफ्रारेड प्रकाश को सोखता है, जबकि पेरोव्स्काइट नीले और उच्च-ऊर्जा वाले प्रकाश को पकड़ता है। इस दोहरी कार्यप्रणाली के कारण, एक ही पैनल से कहीं अधिक बिजली पैदा होती है।

सामान्य सिलिकॉन पैनलों की अधिकतम व्यावहारिक दक्षता लगभग 24 प्रतिशत तक सीमित हो गई थी। प्रयोगशालाओं में शोध के बाद अब यह हाइब्रिड तकनीक 34 प्रतिशत से अधिक की दक्षता प्राप्त कर चुकी है। इसका सीधा मतलब यह है कि समान आकार के पुराने पैनल के मुकाबले ये नए हाइब्रिड पैनल लगभग 40 प्रतिशत ज्यादा बिजली पैदा करेंगे। 2026 की शुरुआत के साथ ही, कई वैश्विक कंपनियों ने इनका बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू कर दिया है।

अब कारों की छतों पर ही ऐसे हाइब्रिड सेल्स लगाए जा सकेंगे जो गाड़ी खड़ी होने पर उसे तेजी से चार्ज कर देंगे, जिससे बार-बार चार्जिंग स्टेशन जाने की जरूरत कम होगी। लैपटॉप बैग, स्मार्टफोन कवर और पोर्टेबल पावर बैंकों में इन सेल्स का इस्तेमाल इन्हें कहीं भी और कभी भी चार्ज करने की शक्ति देगा।

चूंकि ये पैनल कम जगह में ज्यादा बिजली बनाते हैं, इसलिए घरों और फैक्ट्रियों में सोलर सिस्टम लगवाने का खर्च और जगह दोनों कम हो जाएंगे। यह तकनीक न केवल जलवायु परिवर्तन से लड़ने में मदद करेगी, बल्कि ऊर्जा के क्षेत्र में हमारी आत्मनिर्भरता को भी एक नई ऊंचाई पर ले जाएगी।

#सौर_ऊर्जा #SolarEnergy #विज्ञान_समाचार #PerovskiteSolar #स्वच्छ_ऊर्जा #CleanTech2026 #तकनीकी_क्रांति #FutureEnergy #ग्रीन_इंडिया #RenewableRevolution