Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Haryana Teacher Vacancy: जिला विज्ञान और गणित विशेषज्ञ भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन शुरू; जानें पात्रता... Uchana News: उचाना नगर पालिका सचिव 32 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार; ACB हिसार की बड़ी कार्... Haryana Roadways News: परिवहन मंत्री अनिल विज का बड़ा ऐलान; रोडवेज कर्मचारियों को मिलेगा म्यूचुअल ट्र... Haryana Property ID Issue: पोर्टल का सर्वर डाउन होने से हरियाणा में आम जनता परेशान; समाधान के लिए लग... Immigration Fraud Alert: विदेश भेजने के नाम पर बढ़ रही ठगी; एडवोकेट वासु रंजन ने की 'विशेष हेल्प सेल'... Haryana Politics: धरना-प्रदर्शन पर पाबंदी के खिलाफ अभय चौटाला का मोर्चा; CM सैनी को पत्र लिखकर की आद... Faridkot Assault Case: गाड़ियों में सवार होकर आए बदमाशों ने किया हमला; कीमती सामान लूटने और वाहनों क... Punjab Congress News: अंगद सिंह बने पंजाब कांग्रेस OBC विभाग के नए चेयरमैन; हाईकमान ने दी बड़ी जिम्मे... Vande Bharat Express News: कटरा-अमृतसर वंदे भारत का बदला रूट; अब बटाला-गुरदासपुर होकर चलेगी ट्रेन, 4... Ferozepur Crime News: फिरोजपुर में तलवार की नोक पर बड़ी लूट; नकाबपोश लुटेरों ने युवक से छीना मोबाइल औ...

प्रधानमंत्री की चीफ ऑफ स्टाफ का इस्तीफा

लंदन में अचानक नया राजनीतिक संकट गहराया

लंदनः 10 डाउनिंग स्ट्रीट से निकली एक खबर ने ब्रिटिश सरकार की नींव हिला दी है। प्रधानमंत्री की सबसे प्रभावशाली रणनीतिकार और चीफ ऑफ स्टाफ, मॉर्गन मैकस्वीनी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। यह घटनाक्रम केवल एक उच्च-स्तरीय फेरबदल नहीं है, बल्कि इसने लेबर सरकार की चयन प्रक्रिया और नैतिक मापदंडों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

इस राजनीतिक भूचाल का केंद्र लॉर्ड पीटर मेंडेलसन की वाशिंगटन (अमेरिका) में ब्रिटिश राजदूत के रूप में प्रस्तावित नियुक्ति है। हाल ही में लीक हुए गोपनीय दस्तावेजों से यह खुलासा हुआ कि मैकस्वीनी ने मेंडेलसन के नाम की पुरजोर सिफारिश की थी, जबकि उनके तार दिवंगत अमेरिकी फाइनेंसर और सजायाफ्ता अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़े होने की खबरें सार्वजनिक थीं।

मैकस्वीनी पर आरोप है कि उन्होंने प्रधानमंत्री को दी गई ब्रीफिंग में इन संवेदनशील तथ्यों को कम करके दिखाया या पूरी तरह नजरअंदाज किया।

विपक्षी दलों का दावा है कि एक ऐसे व्यक्ति को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक पद पर बिठाने की कोशिश करना, जिसके अतीत पर गंभीर सवाल हों, ब्रिटेन की अंतरराष्ट्रीय साख को खतरे में डालना है। अपने त्याग पत्र में मॉर्गन मैकस्वीनी ने असाधारण ईमानदारी दिखाते हुए यह स्वीकार किया कि उनके निर्णय ने सरकार की छवि को धूमिल किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की अखंडता किसी भी व्यक्ति से ऊपर है और वह इस विफलता की पूरी नैतिक जिम्मेदारी लेते हैं।

चीफ ऑफ स्टाफ का पद ब्रिटिश सरकार की रीढ़ माना जाता है। मैकस्वीनी न केवल प्रधानमंत्री की सबसे करीबी सलाहकार थीं, बल्कि सरकार की नीतियों के पीछे का दिमाग भी मानी जाती थीं। उनके जाने से उत्पन्न हुए शून्य के कई मायने हैं। कंजर्वेटिव पार्टी और अन्य विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री की निर्णय क्षमता पर सवाल उठाए हैं, जिससे सरकार रक्षात्मक मुद्रा में आ गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह इस्तीफा एक डोमिनो इफेक्ट शुरू कर सकता है, जिससे आने वाले दिनों में कैबिनेट के भीतर और भी कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। फिलहाल मेंडेलसन की नियुक्ति ठंडे बस्ते में जाती दिख रही है, जिससे अमेरिका के साथ कूटनीतिक संबंधों के प्रबंधन में देरी हो सकती है।

मॉर्गन मैकस्वीनी का इस्तीफा लेबर पार्टी के लिए हनीमून पीरियड के खत्म होने का संकेत है। अब प्रधानमंत्री के सामने सबसे बड़ी चुनौती एक ऐसे उत्तराधिकारी को खोजने की है जो सरकार की खोई हुई साख को पुनः स्थापित कर सके।