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अंतिम समय में चीन ने मौत की सजा को बदला

चीन-कनाडा संबंध में कनाडाई नागरिक बचा

बीजिंगः चीन और कनाडा के बीच लंबे समय से जारी कूटनीतिक गतिरोध के बीच आज सुबह बीजिंग से आई एक खबर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है। चीन की एक उच्च अदालत ने नशीले पदार्थों की तस्करी और कथित जासूसी के संगीन आरोपों में सजायाफ्ता एक कनाडाई नागरिक की मृत्युदंड की सजा को आधिकारिक तौर पर उम्रकैद में तब्दील कर दिया है।

यह कानूनी रियायत ऐसे समय में दी गई है जब दोनों देशों के बीच कड़वाहट भरे रिश्तों में पहली बार जमी हुई बर्फ पिघलती नजर आ रही है। इस नागरिक को कई साल पहले एक विवादास्पद मुकदमे के बाद मौत की सजा सुनाई गई थी, जिसे कनाडा और उसके पश्चिमी सहयोगियों ने बंधक कूटनीति का हिस्सा करार दिया था।

कनाडा के विदेश मंत्रालय ने इस अदालती आदेश पर तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए इसका सावधानीपूर्वक स्वागत किया है। हालांकि, ओटावा ने स्पष्ट किया है कि उनकी प्राथमिकता अभी भी अपने नागरिक की पूर्ण रिहाई और उसे सुरक्षित स्वदेश वापस लाना है। कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजिंग का यह कदम शुद्ध रूप से कानूनी नहीं, बल्कि एक सोची-समझी सॉफ्ट डिप्लोमेसी की रणनीति है।

चीन वर्तमान में अपनी सुस्त पड़ती अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए पश्चिम के साथ, विशेषकर जी-7 देशों के साथ, अपने व्यापारिक संबंधों को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में एक कनाडाई नागरिक की जान बख्शना तनाव कम करने की दिशा में एक जैतून की शाखा पेश करने जैसा है।

दूसरी ओर, मानवाधिकार समूहों और भू-राजनीतिक जानकारों ने इस पर संदेह भी व्यक्त किया है। उनका तर्क है कि चीन अक्सर विदेशी नागरिकों को सौदाकारी के मोहरे के रूप में इस्तेमाल करता है ताकि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी शर्तों को मनवा सके। यह मामला वर्षों पहले तब सुर्खियों में आया था जब कनाडा में एक चीनी टेक कंपनी की वरिष्ठ अधिकारी की गिरफ्तारी के बाद प्रतिक्रिया स्वरूप चीन ने कनाडाई नागरिकों को हिरासत में लेना शुरू किया था।

भले ही इसके पीछे की मंशा जो भी हो, लेकिन इस सजा की कमी ने ओटावा और बीजिंग के बीच उच्च स्तरीय वार्ता के बंद पड़े दरवाजों को फिर से खोलने की उम्मीद जगा दी है। यदि आगामी कुछ हफ्तों में दोनों देशों के राजनयिकों के बीच सीधी बातचीत शुरू होती है, तो इसे प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जाएगा। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि जटिल अंतरराष्ट्रीय संबंधों में न्यायपालिका के फैसलों का उपयोग अक्सर कूटनीतिक संदेश भेजने के लिए एक प्रभावी उपकरण के रूप में किया जाता है।