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प्रधानमंत्री स्पीकर के पीछे छिप रहे हैं: कांग्रेस

सदन में नरेंद्र मोदी भाषण देने ही नहीं आये, बिड़ला का खुलासा

  • तीन महिला सांसदों का पोस्टर प्रदर्शन

  • लोकसभा अध्यक्ष ने कहा सुरक्षा का सवाल

  • राहुल की बातों से गर्म है सदन का माहौल

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर लोकसभा अध्यक्ष के पीछे छिपने का आरोप लगाते हुए उन पर तीखा हमला बोला है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि उन्होंने स्वयं प्रधानमंत्री से सदन में न आने का अनुरोध किया था। बिरला के अनुसार, महिला सांसदों के विरोध प्रदर्शन के कारण सुरक्षा संबंधी चिंताओं को देखते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री को उस समय सदन में न आने की सलाह दी थी, जब उन्हें राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का उत्तर देना था। अंततः, लोकसभा ने प्रधानमंत्री के पारंपरिक उत्तर के बिना ही राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पारित कर दिया।

वायनाड की सांसद प्रियंका गांधी ने गुरुवार को लोकसभा की कार्यवाही कुछ ही सेकंड में स्थगित होने के बाद कड़े शब्दों में अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री स्पीकर के पीछे छिप रहे हैं। कल उनमें सदन में आने की हिम्मत नहीं थी क्योंकि तीन महिलाएं बेंच के सामने खड़ी थीं। यह कैसी निरर्थक बात है? सदन में कोई चर्चा नहीं हो रही है क्योंकि सरकार स्वयं चर्चा नहीं चाहती। वहीं, कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने अध्यक्ष द्वारा जताई गई सुरक्षा चिंताओं को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिला सांसद केवल अपना विरोध दर्ज कराने के लिए वहां मौजूद थीं।

ओम बिरला ने आरोप लगाया कि सांसद प्रधानमंत्री की कुर्सी के पास कोई अनुचित घटना को अंजाम दे सकती थीं, इसलिए उन्होंने प्रधानमंत्री को सदन में न आने की सलाह दी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए पवन खेड़ा ने कहा, क्या मोदी सरकार और उनके अधीन पत्रकार यह कहना चाह रहे हैं कि महिलाएं स्वाभाविक रूप से हिंसक होती हैं?

क्या किसी महिला द्वारा किया गया विरोध प्रदर्शन आतंकवाद माना जाता है? क्या मोदी सरकार और उनके समर्थक पत्रकारों को एक दलित महिला सांसद के खड़े होने से परेशानी थी? क्या वे उन्हें अछूत मानते हैं? उन्होंने आगे कहा कि मोदी सरकार और उनके चाटुकार पत्रकारों को देश की महिलाओं, विशेषकर दलित महिलाओं से माफी मांगनी चाहिए।

विपक्ष केंद्र सरकार के खिलाफ कई मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन कर रहा है। इनमें प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौता शामिल है, जिसके बारे में विपक्ष का दावा है कि इससे किसानों और कृषि क्षेत्र को नुकसान होगा। इसके अलावा, बजट सत्र के दौरान आठ विपक्षी सांसदों का निलंबन, महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णयों में संसद को दरकिनार करने के आरोप और पूर्व सेना प्रमुख एम.एम. नरवणे के संस्मरण से जुड़ा विवाद भी तनाव का मुख्य कारण बना हुआ है। राहुल गांधी ने इन्हीं मुद्दों का हवाला देते हुए सरकार पर राष्ट्रीय हितों से समझौता करने का आरोप लगाया है, जिससे सदन के भीतर और बाहर राजनीतिक पारा चढ़ गया है।