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शांति वार्ता के अगले दौर के ठीक पहले फिर से युद्ध भड़का

हवाई हमलों का सबसे भीषण चरण

कीवः रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध ने आज एक ऐसा मोड़ ले लिया है जिसे सैन्य विश्लेषक इस संघर्ष का अब तक का सबसे घातक हवाई अभियान मान रहे हैं। पिछले 8 घंटों के दौरान, रूसी सेना ने यूक्रेन के नागरिक बुनियादी ढांचे, विशेष रूप से ऊर्जा ग्रिड को निशाना बनाकर एक सर्जिकल लेकिन व्यापक हमला बोला है। यूक्रेनी वायु सेना के आधिकारिक कमांड सेंटर से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, यह हमला एक मल्टी-वेव रणनीति के तहत किया गया, जिसमें ईरानी मूल के लगभग 450 शहीद आत्मघाती ड्रोन और 70 से अधिक क्रूज व बैलिस्टिक मिसाइलें शामिल थीं।

यह हमला तब हुआ है जब अबू धाबी में अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों की देखरेख में एक संभावित शांति वार्ता की रूपरेखा तैयार की जा रही थी। विशेषज्ञों का मानना है कि मॉस्को ने इस समय का चयन बहुत सोच-समझकर किया है। इस भीषण गोलाबारी के जरिए रूस का उद्देश्य केवल भौतिक नुकसान पहुँचाना नहीं, बल्कि बातचीत की मेज पर अपनी शर्तों को मनवाना है। क्रेमलिन यह स्पष्ट संदेश देना चाहता है कि उसके पास पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद युद्ध जारी रखने और यूक्रेन की सैन्य व नागरिक सहनशक्ति को तोड़ने की पर्याप्त क्षमता मौजूद है।

हमले का प्राथमिक लक्ष्य यूक्रेन की एनर्जी रीढ़ थी। कीव, खारकीव, ओडेसा और ल्वीव जैसे प्रमुख शहरों में थर्मल पावर प्लांट और हाई-वोल्टेज सबस्टेशनों पर सटीक प्रहार किए गए। इसके परिणामस्वरूप, यूक्रेन का लगभग 40 फीसद बिजली नेटवर्क अस्थाई रूप से ठप हो गया है। कड़ाके की ठंड और शून्य से नीचे गिरते तापमान के बीच, लाखों नागरिक बिना बिजली, पानी और हीटिंग के रहने को मजबूर हैं। कीव के मेयर विटाली क्लिट्स्को ने पुष्टि की है कि शहर के कई जिलों में मलबे के कारण आपातकालीन सेवाओं का पहुँचना भी मुश्किल हो रहा है।

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने इस हमले को ऊर्जा आतंकवाद करार दिया है। उन्होंने नाटो और यूरोपीय संघ से तत्काल पैट्रियट जैसी उन्नत वायु रक्षा प्रणालियों की मांग की है। जेलेंस्की सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक रूस नागरिक आबादी पर ऐसे बर्बर हमले जारी रखता है, तब तक शांति वार्ता का कोई औचित्य नहीं है। इस घटना ने पूरे यूरोप में सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है, क्योंकि मिसाइलों का मलबा पड़ोसी देशों की सीमाओं के करीब भी गिरा है। यह हमला दर्शाता है कि युद्ध अब केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह यूक्रेन के अस्तित्व और उसकी नागरिक व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त करने की ओर बढ़ रहा है।