सीरिया के अल-तनफ बेस पर जबर्दस्त हमला
दमिश्कः सीरिया के दक्षिणी त्रिकोण में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने अल-तनफ पर पिछले कुछ घंटों में हुआ ड्रोन हमला केवल एक सैन्य घटना नहीं, बल्कि एक बड़ा भू-राजनीतिक उकसावा है। इस हमले ने पूरे मध्य-पूर्व को एक ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है, जहाँ से एक बड़ी क्षेत्रीय जंग की शुरुआत हो सकती है। शुरुआती खुफिया इनपुट और सैन्य विशेषज्ञों के विश्लेषण के अनुसार, इस हमले के पीछे ईरान समर्थित मिलिशिया समूहों का हाथ होने की प्रबल संभावना है, जो लंबे समय से इस क्षेत्र से अमेरिकी सेना की वापसी की मांग कर रहे हैं।
रक्षा सूत्रों के अनुसार, हमले में लो-फ्लाईंग (सतह के करीब उड़ने वाले) आत्मघाती ड्रोनों का एक झुंड इस्तेमाल किया गया था। ये ड्रोन रडार की नजर से बचने में सक्षम थे और बेस की उन्नत सुरक्षा प्रणालियों को चकमा देते हुए सुरक्षा दीवार को भेदने में सफल रहे। पेंटागन ने पुष्टि की है कि हमले के दौरान बुनियादी ढांचे को क्षति पहुँची है, लेकिन समय रहते चेतावनी मिलने के कारण जवानों को सुरक्षित बंकरों में स्थानांतरित कर दिया गया था, जिससे बड़ी संख्या में हताहत होने की घटना टल गई।
अल-तनफ बेस का स्थान सैन्य रूप से अत्यंत संवेदनशील है। यह इराक, सीरिया और जॉर्डन की सीमाओं के संगम पर स्थित है। अमेरिका के लिए यह बेस न केवल इस्लामिक स्टेट के पुनरुत्थान को रोकने के लिए जरूरी है, बल्कि यह ईरान से लेबनान तक जाने वाले जमीनी आपूर्ति मार्ग की निगरानी करने का एक प्रमुख केंद्र भी है। यही कारण है कि यह बेस अक्सर ईरान समर्थित समूहों के निशाने पर रहता है।
यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब गाजा और लेबनान में जारी संघर्ष के कारण पूरा क्षेत्र पहले से ही बारूद के ढेर पर बैठा है। व्हाइट हाउस ने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए सटीक और प्रभावी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। अमेरिकी वायु सेना ने संदिग्ध ठिकानों पर रीपर ड्रोनों और टोही विमानों की गश्त बढ़ा दी है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिका ने सीरिया या इराक के भीतर मिलिशिया ठिकानों पर कड़ा जवाबी हमला किया, तो यह ईरान के साथ सीधे टकराव को जन्म दे सकता है। वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय कूटनीति इस बात पर केंद्रित है कि किसी तरह इस उकसावे को एक पूर्ण क्षेत्रीय युद्ध में बदलने से रोका जा सके।