पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता का दौर फिर से भड़का
इस्लामाबादः पाकिस्तान की सियासत में आज एक बार फिर भारी उथल-पुथल देखने को मिली, जब इस्लामाबाद की एक आतंकवाद विरोधी अदालत ने पूर्व प्रधानमंत्री और पीटीआई के संस्थापक इमरान खान की बहन, अलीमा खान के खिलाफ गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया। यह वारंट ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक कंगाली और आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर बुरी तरह घिरा हुआ है। इस अदालती आदेश ने देश में एक नए राजनीतिक टकराव की नींव रख दी है, जिससे आने वाले दिनों में देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों की आशंका प्रबल हो गई है।
यह कानूनी कार्रवाई मुख्य रूप से पिछले वर्ष 24 नवंबर को इस्लामाबाद और रावलपिंडी में हुए पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के विशाल विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी है। उस समय, पीटीआई समर्थकों और सुरक्षा बलों के बीच भीषण झड़पें हुई थीं, जिसमें जान-माल का काफी नुकसान हुआ था। वर्तमान शहबाज शरीफ सरकार का दावा है कि अलीमा खान ने न केवल प्रदर्शनकारियों को उकसाया, बल्कि राज्य के संस्थानों के खिलाफ विद्रोह की योजना बनाने में भी सक्रिय भूमिका निभाई। सरकार का तर्क है कि यह कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है और किसी भी व्यक्ति को हिंसा भड़काने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
दूसरी ओर, पीटीआई नेतृत्व ने इस वारंट को फासीवाद और राजनीतिक प्रतिशोध की पराकाष्ठा बताया है। पार्टी के अनुसार, चूंकि इमरान खान लंबे समय से जेल में बंद हैं, इसलिए उनकी बहनें—विशेषकर अलीमा खान—पार्टी कार्यकर्ताओं के मनोबल को बनाए रखने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी आवाज उठाने का काम कर रही थीं। पीटीआई का कहना है कि सरकार परिवार के सदस्यों को निशाना बनाकर इमरान खान को मानसिक रूप से तोड़ने की कोशिश कर रही है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने चेतावनी दी है कि इस तरह के हथकंडे जनता के आक्रोश को और भड़काएंगे।
यह हाई-प्रोफाइल वारंट एक ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान की राज्य मशीनरी कई मोर्चों पर नाकाम होती दिख रही है। एक तरफ बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के आत्मघाती हमलों ने देश की सुरक्षा व्यवस्था को हिला दिया है, तो दूसरी तरफ खैबर पख्तूनख्वा में आतंकवाद की नई लहर ने प्रशासन की नींद उड़ा रखी है। आर्थिक मोर्चे पर भी महंगाई और कर्ज का बोझ जनता को कुचल रहा है। ऐसे में इमरान खान के परिवार पर कार्रवाई करने से राजनीतिक ध्रुवीकरण और बढ़ने की संभावना है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि अलीमा खान की गिरफ्तारी होती है, तो यह पाकिस्तान की कमजोर पड़ती लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए एक और बड़ा झटका होगा, जिससे देश में गृहयुद्ध जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।