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चुनाव से ठीक पहले बांग्लादेश की अदालत का एक और फैसला

शेख हसीना को दस साल की सजा सुनायी गयी

ढाकाः  बांग्लादेश के राजनीतिक इतिहास में आज का दिन एक निर्णायक मोड़ के रूप में दर्ज किया गया है। ढाका की एक विशेष अदालत ने देश की सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहीं शेख हसीना को भ्रष्टाचार के एक हाई-प्रोफाइल मामले में दोषी करार देते हुए 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला जिन्जिरा आवास परियोजना में हुए करोड़ों टका के गबन और आधिकारिक पद के दुरुपयोग से जुड़ा है। अदालत ने न केवल हसीना, बल्कि उनकी भतीजी और उनके मंत्रिमंडल के कई पूर्व कद्दावर मंत्रियों को भी इस वित्तीय अनियमितता का दोषी पाया है।

अगस्त 2024 में छात्रों के नेतृत्व में हुए व्यापक जन-आंदोलन के बाद, जब शेख हसीना को अचानक पद छोड़कर भारत में शरण लेनी पड़ी थी, उसके बाद से यह उनके खिलाफ सुनाया गया पहला बड़ा न्यायिक फैसला है। अदालत ने अपने विस्तृत फैसले में टिप्पणी की कि सत्ता का उपयोग जनहित के बजाय निजी संपत्ति बनाने और सरकारी कोष को नुकसान पहुँचाने के लिए किया गया। अभियोजन पक्ष ने दस्तावेजी सबूत पेश किए कि कैसे आवास परियोजना के लिए आवंटित धन को फर्जी कंपनियों और निजी खातों में स्थानांतरित किया गया था।

इस सजा के अंतरराष्ट्रीय निहितार्थ बेहद गहरे हैं। चूंकि शेख हसीना वर्तमान में भारत में रह रही हैं, इसलिए यह फैसला नई दिल्ली और ढाका के बीच कूटनीतिक तनाव को बढ़ा सकता है। बांग्लादेश की वर्तमान अंतरिम सरकार अब औपचारिक रूप से भारत से शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग तेज कर सकती है। भारत के लिए यह एक कठिन स्थिति होगी, क्योंकि हसीना एक लंबे समय तक सहयोगी रही हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय कानूनी प्रोटोकॉल और पड़ोसी देश की नई सरकार के साथ संबंधों को संतुलित करना एक बड़ी चुनौती होगी।

घरेलू स्तर पर, इस फैसले ने बांग्लादेश को दो गुटों में बांट दिया है। जहां एक तरफ अंतरिम सरकार और विपक्षी दल इसे न्याय की जीत और भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़े सफाई अभियान के रूप में देख रहे हैं, वहीं शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है। पार्टी के समर्थकों का आरोप है कि यह एक कंगारू कोर्ट का फैसला है, जिसका एकमात्र उद्देश्य अवामी लीग के नेतृत्व को राजनीतिक रूप से खत्म करना है। आने वाले दिनों में ढाका और अन्य बड़े शहरों में इस फैसले के समर्थन और विरोध में हिंसक प्रदर्शनों की आशंका जताई जा रही है, जो बांग्लादेश की स्थिरता के लिए एक नई चुनौती बन सकता है।